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घर के बिजली के बिल का उचित प्रबंधन करने के लिए सही इन्वर्टर का चुनाव

By on June 27, 2022 with 117 Comments  

भारत में बिजली कटौती एक बहुत सामान्य घटना हैं, जो की भारत के कई भागों में नित्य देखने को मिलती हैं| हर गुजरते दिन के साथ, बिजली की आपूर्ति और मांग के बीच स्पष्ट अंतर बढ़ता ही जा रहा हैं| अधिक से अधिक लोग बिजली कटौती के दौरान अपने घरों का  समुचित ऊर्जा-प्रबंधन करने के लिए विभिन्न समाधानो के प्रति अधिक सजक हो रहे हैं| इसलिए, बिजली इनवर्टर भारत में हर गुजरते दिन के साथ अधिक लोकप्रिय भी होते जा रहे हैं|  हालांकि बिजली इनवर्टर बिजली कटौती के समय अत्यंत मददगार साबित होते हैं, लेकिन अगर उनका ठीक से चुनाव, स्थापना या रखरखाव नहीं किया जाए, तब वह आपके बिजली के बिल में बढ़ोतरी के रूप में, हानि भी पंहुचा सकते है| उनकी अक्षमता, आपको बिजली कटौती के दौरान, बिजली की वास्तविक राशि से कही अधिक का भुगतान करने के लिए मज़बूर भी कर सकती हैं|

हम इस लेख के माध्यम से सही इन्वर्टर का चुनाव और इन्वर्टर का बिजली के बिल पर पड़ने वाले कुल प्रभाव को समझाने का प्रयन्त कर रहे हैं|

इनवर्टर क्या होते हैं और वे कैसे काम करते हैं?

इनवर्टर जैसा की हमे पता हैं, यूपीएस (या निर्बाध बिजली की आपूर्ति) का एक रूप होते हैं| इसकी ३ इकाइयां होती हैं 1) चार्जर 2) बैटरी और 3) इनवर्टर (जैसा कि इनको खुद  कहा भी जाता हैं)| चार्जर बिजली की आपूर्ति से जुड़ा होता हैं, और वो बैटरी को बिजली के माध्यम से चार्ज करता हैं| इन्वर्टर, वह उपकरण (डिवाइस) हैं जो डायरेक्ट करंट (डीसी) को अल्टेरनाटिंग करंट (ऐसी) में बदलता हैं| जब बिजली वितरक कंपनी (यूटिलिटी) से बिजली आनी बंद हो जाती हैं, तब इनवर्टर सक्रिय हो जाता है और घर को बिजली उपलब्ध कराना शुरू कर देता हैं|

इनवर्टर की कार्यक्षमता

इनवर्टर में ऐसे 2 चक्र होते हैं, जहाँ उसकी कार्यक्षमता प्रमुख भूमिका निभाती हैं:

  1. चार्जिंग: जब हम बैटरी को बिजली के माध्यम से चार्ज करते हैं, तब इन्वर्टर की कार्यक्षमता बैटरी क्षमता पर निर्भर करती हैं| एक लेड एसिड बैटरी, जो आम तौर पर इनवर्टर में प्रयोग की जाती हैं, 100 फीसदी कार्य-कुशल नहीं होती है| जब बैटरी 50 फीसदी या उससे कम चार्ज होती हैं, तब इन्वर्टर की कार्यक्षमता जो प्रारम्भतः 90 फीसदी या उससे अधिक हो सकती  हैं, और वह अमूमन 60 फीसदी तक गिर जाती हैं, अगर बैटरी को हम 80 फीसदी तक भी चार्ज कर दे तो भी इन्वर्टर की क्षमता में कोई बढ़ोतरी नहीं होती हैं (स्रोत)|  इस कारण से बैटरी की दक्षता का स्तर अच्छा बनाये रखने के लिए उसका नियमित रूप से रखरखाव व चार्जिंग बहुत महत्वपूर्ण होता हैं|
  2. यह भी महत्वपूर्ण है की हम इन्वर्टर में लगने वालीं बैटरी का सही प्रकार से चयन करे ताकि इन्वर्टर को अधिक कार्यक्षमता हासिल हो सके| इसलिए, ब्रांडेड बैटरी खरीदना एक बेहतर विकल्प होते हैं| क्यूंकि स्थानीय (लोकल) बैटरी की कार्यक्षमता बहुत अच्छी नहीं होती हैं, वह सस्ती जरूर होती है लेकिन उनकी अक्षमताओं के कारण बिजली के कुल खर्च में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी भी हो सकती हैं| बाजार में उपलब्ध बैटरी मुख्यतः 3 प्रकार के होते हैं:  1) फ्लैट प्लेट बैटरी 2) ट्यूबलर बैटरी 3) रखरखाव मुक्त बैटरी| इन तीनो बैटरियों में फ्लैट प्लेट बैटरी सबसे सस्ती बैटरी होती हैं, लेकिन उनका जीवनकाल कम होता हैं, और अधिक रखरखाव की आवश्यकता उन्हें पड़ती हैं| रखरखाव मुक्त बैटरी मध्यम जीवनकाल की होती हैं, रखरखाव कम परन्तु अधिक लागत की होती हैं| ट्यूबलर बैटरी भी लंबे जीवनकाल, मध्यम रखरखाव और उच्च लागत की होती हैं|
  3. इनवर्टर के लिए कार बैटरी का उपयोग न करें, वे घर की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उपयुक्त नहीं हैं (स्रोत).
  4. इन्वर्टर  द्वारा डायरेक्ट करंट (डीसी) को अल्टेरनाटिंग करंट (ऐसी) में रूपांतरण: इनवर्टर की कार्यक्षमता 50 फीसदी से 90 फीसदी (पीक लोड स्थिति में) तक भिन्न हो सकती हैं (स्रोत)| इन्वर्टर निरंतर बैटरी से बिजली को खींचता हैं, यहां तक ​​कि तब भी जब कोई ऊर्जा का इस्तेमाल न किया जा रहा हो|

इसलिए जब इन्वर्टर कम ऊर्जा खींचता हैं, तब फलस्वरूप उसकी कार्यक्षमता भी कम हो जाती हैं| इसलिए, इनवर्टर की कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए उसका ठीक आकार का होना, अत्यंत महत्वपूर्ण होता हैं| हमारे लिए एक इनवर्टर खरीदने से पहले अपने घर के पूर्ण लोड का सही ज्ञात होना भी जरूरी हैं|  इनवर्टर का भार वोल्ट एम्पीयर (VA) में वर्णित होता हैं, जो की वाट के लगभग बराबर ही होता है|  इसलिए आवश्यक लोड की गणना करने के लिए, हमे उपकरणों की संपूर्ण वाट क्षमता का कुल योग कर देना चाहिए|

बाजार में उपलब्ध इनवर्टर के 2 प्रकार होते हैं: 1) मॉडिफाइड साइन वेव और 2 ) प्योर साइन वेव इनवर्टर (स्रोत)| मॉडिफाइड (संशोधित) साइन वेव इनवर्टर हालांकि सस्ते होते हैं, पर उनकी कार्यक्षमता कम होती हैं| वे कम अंत-उपकरणों के साथ काम करने में कुशल तो होते हैं, परन्तु उनसे लगातार एक बज्ज (भनभनाहट सी ध्वनि) भी उत्पन्न होती रहती हैं| इन मॉडिफाइड साइन वेव इन्वर्टर से गर्मी के रूप में काफी बिजली का भी नुक्सान होता हैं| ये कुछ संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए भी नुकसानदायक सिद्ध हो सकते हैं|

प्योर साइन वेव इनवर्टर हालांकि महंगे जरूर होते हैं, परन्तु यह सबसे अधिक कार्यकुशल होते हैं| यह उच्च -उपकरणों को चलाने में भी पूर्ण सक्षम होते हैं| अगर आप के पास ऑडियो सिस्टम और वीडियो गेम जैसे उच्च उपकरण हैं तो उनके लिए भी प्योर साइन वेव इन्वर्टर ज़्यादा अच्छे होते हैं| यह बिजली वितरक कंपनी द्वारा दी गई आपूर्ति की समुचित व दक्षतापूर्ण खपत करते हैं|

एक इन्वर्टर निश्चित रूप से बिजली की कटौती के दौरान बहुत उपयोगी उपकरण होता हैं| यह अपने उपभोगताओं को काफी राहत भी प्रदान करता हैं| लेकिन अगर सही इन्वर्टर का चुनाव नहीं हुआ या उसका ठीक से उनका रखरखाव नहीं रखा गया, तब वह अपने उपभोगताओं के बिजली के बिल में भारी वृद्धि व नुकसान पंहुचा सकते हैं|  इसलिए यह आवश्यक हैं, की आप इन्वर्टर खरीदते समय उसका पूर्ण ऑपरेशनल (परिचालन) लागत का सही अंदाज़ा रखे|

इन्वर्टर बैटरी कैलकुलेटर

इन्वर्टर बैटरी और सोलर पैनल का हिसाब लगाने के लिए हमने एक कैलकुलेटर बनाया है जो आप इस्तेमाल कर सकते हैं। यह कैलकुलेटर सिर्फ ऑफ-ग्रिड सोलर का हिसाब लगाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसको इस्तेमाल करने के लिए नीचे दिए गए निर्देश देखें:

1) आपको जो भी उपकरण इन्वर्टर या सोलर पर चलने हैं उनको इस कैलकुलेटर में डालें। कैलकुलेटर में हमने अपनी जानकारी के हिसाब से उपकरणों के वाट्स डाले हैं। पर अगर आपको लगता है की आपके उपकरण का अलग वाट है तो आप उसको अपने हिसाब से बदल सकते हैं। और उपकरण डालने के लिए आप “और उपकरण डालें” वाला बटन इस्तेमाल कर सकते हैं। किसी उपकरण को हटाने के लिए “X” बटन का इस्तेमाल करें।

2) हमने अपनी जानकारी और लोगों के सवालों के आधार पर इस कैलकुलेटर में कुछ उपकरण डाले हैं। अगर आपको अपना उपकरण न मिले तो आप उसको आखरी में दिए गए “Custom” का इस्तेमाल कर के डाल सकते हैं।

3) कृपया “इस्तेमाल घंटों” में उपकरण जितनी देर इन्वर्टर या सोलर पर चलने वाला है उतनी ही देर डालें। अगर आप किसी उपकरण हो 15 मिनट ही चलने वाले हैं तो 0.25 डालें।

4) हिसाब लगाने के लिए नीचे दिए गए “हिसाब लगाओ” बटन को दबाएं। अगर आपको सोलर का भी हिसाब लगाना है तो “सोलर पैनल का हिसाब” चेकबॉक्स को ज़रूर चुनें।

5) आप अगर चाहें तो अपने हिसाब का प्रिंट भी ले सकते हैं।

6) कृपया इस कैलकुलेटर को छोटे और घरेलु उपकरणों के लिए ही इस्तेमाल करें। यह बड़े कमर्शियल या इंडस्ट्रियल उपकरणों के लिए नहीं बना है।

भारत में कुछ अच्छे इन्वर्टर

About the Author:
Abhishek Jain is an Alumnus of IIT Bombay with almost 10 years of experience in corporate before starting Bijli Bachao in 2012. His passion for solving problems moved him towards Energy Sector and he is keen to learn about customer behavior towards Energy and find ways to influence the same towards Sustainability. .

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