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टेलीविजन/कम्प्यूटर/ऑडियो सिस्टम की बिजली खपत पर चमक और वॉल्यूम का प्रभाव

By on August 27, 2015

सभी मनोरंजन प्रणालियां का प्रमुख कार्य आपकी ज्ञानेन्द्रियों को सुखदायक अनुभूति  प्रदान करना होता हैं। टीवी देखना  या एक ऑडियो सिस्टम को सुनना  न केवल आपके  मस्तिष्क को उत्तेजित करता है, बल्कि  यह आपके आँखों और कानो को भी प्रभावित करता है। हाल के वर्षों में टीवी की बढ़ती  चमक आपकी  आंखों को अतिरिक्त आराम  प्रदान करती है। लोग इलेक्ट्रॉनिक दुकानों में उज्ज्वल टीवी डिस्प्ले से स्पष्टतः आकर्षित हो रहे है और इस वजह से  निर्माताओं ने  भी तेजी से टीवी की चमक में बढ़ोतरी  की हैं। इतना ही नहीं सामान्य रूप से,  नई पीढ़ी में उच्च ध्वनि के लिए उन्माद में भी बढ़ोतरी हुईं है और नई पीढ़ी तेज आवाज़ टेलीविजन को पसंद भी करती हैं और  शायद इस कारण आजकल के टीवीओ के  साउंड सिस्टम में  भी सुधार हुआ है और वह तेज  हो गए हैं। हालांकि, हम यहाँ बढ़ती चमक और उच्च ध्वनि का आपके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव की चर्चा तो नहीं करने वाले हैं (हालांकि, कोई इस तथ्य से इनकार करता है, आपका स्वास्थ्य निश्चित रूप से प्रभावित होता हैं), परन्तु हम चमकदार रोशनी और तेज आवाज से टेलीविजन/कम्प्यूटर/ऑडियो सिस्टम उपकरणों द्वारा हुए बिजली खपत पर यहाँ चर्चा जरूर करेंगे|

अधिक प्रकाश का मतलब अधिक वाट

परंपरागत रूप से हम हमेशा अधिक प्रकाश या चमक को अधिक वाट के साथ संबंधित करते है। जब हमें अधिक प्रकाश की आवश्यकता होती है, तब हम उच्च वाट क्षमता का एक बल्ब खरीद लेते है। जब हमे कम प्रकाश की आवश्यकता होती है, तब हम कम वाट क्षमता का उपकरण खरीदते है और यह तथ्य किसी भी प्रकाश विकिरण करने वाले उपकरण के लिए बिलकुल लागू होती है, फिर चाहे वो एक टीवी, कंप्यूटर, मोबाइल फोन या टेबलेट हो यह सबके लिए एक ही मायने रखती है। जब आप इनकी सेटिंग अधिक उज्जवल रखते हैं, तो ये बिजली की अधिक खपत करते हैं। मोबाइल फोन या टैबलेट उच्च सेटिंग्स पर अक्सर आसानी से डिस्चार्ज हो जाते हैं और टीवी या कंप्यूटर उच्च सेटिंग्स पर और अधिक बिजली की खपत करते हैं|

एक बार जब हम टीवी द्वारा हुए बिजली खपत को मापने की कोशिश कर रहे थे, तब हमने एक दिलचस्प अवलोकन किया, हमने पाया की टीवी को स्विच ऑन करने, पर इसकी बिजली की खपत (या वाट क्षमता) स्थिर रहती हैं, परन्तु हर दृश्य परिवर्तन के साथ वाट क्षमता में बदलाव आता हैं| जब दृश्य उज्ज्वल था, तब टीवी द्वारा हुए बिजली की खपत अधिक होती थी| जब दृश्य थोड़ा अस्पष्ट या कहे अन्धकारमय था, तब बिजली की खपत कम होती थी।  तो दृश्य जितने गहरे या काले होंगे, बिजली की खपत भी उतनी ही कम होगी।

कुछ साल पहले ऊर्जा के प्रति जागरूक प्रौद्योगिकीविदों के एक समूह द्वारा गूगल ऊर्जा बचत संस्करण का शुभारंभ किया गया| इस परियोजना को “ब्लैकले”  (www.blackle.com) का नाम दिया गया है। यह वेबसाइट पर एक ब्लैक रंग की पृष्ठभूमि के साथ गूगल सर्च इंजन है। उन्होंने दावा किया की यदि प्रत्येक उपयोगकर्ता गूगल के ब्लैक संस्करण को अपनाता है तो दुनिया प्रत्येक वर्ष  750 मेगा किलो वाट-घंटा की बिजली की बचत करेगी| अतः इससे हमे यह पता चलता हैं कि, स्क्रीन को अधिक उज्जवल रखने से बिजली का अधिक उपभोग होता हैं|

उपकरणों पर डिफ़ॉल्ट चमक सेटिंग्स

आजकल बाजार में ज्यादातर टीवी एवं कंप्यूटर, अमूमन डिफ़ॉल्ट सेटिंग के साथ आते हैं। जिससे यह अपेक्षाकृत सामान्य रूप के टीवी एवं कंप्यूटर से अधिक उज्जवल होते हैं| इस तरह की सेटिंग, एक दुकान में आँखों को आकर्षित करने के लिए तो उचित हो सकती  है, परन्तु इसको घरेलु और नियमित इस्तेमाल के लिए अनुकूल नहीं माना जाता हैं। यह बहुत महत्त्वपूर्ण हैं, की आप अपने घर में टीवी/कंप्यूटर में  सेटिंग्स को इष्टतम चमक या कंट्रास्ट पर सेट करें|  यह न केवल  देखने की दृष्टि के परीपेक्ष से  अच्छा होगा, बल्कि इष्टतम चमक से इन उपकरणों द्वारा बिजली की खपत भी कम हो जाएगी।

यहां तक की मोबाइल फोन और टेबलेट के लिए भी यह महत्त्वपूर्ण है की आप इस तरह से चमक को समायोजित करें की स्क्रीन की दृश्यता न केवल अच्छी हो, परन्तु आप अतिरिक्त बैटरी को समाप्त होने से बचाएँ| इसलिए यह उचित है,की इन उपकरणों की चमक को उच्चतम स्तर पर नहीं रखना चाहिएं हैं|

उपकरणों पर ऊर्जा बचत की सेटिंग

इन दिनों कई टीवी और कंप्यूटर ऊर्जा की बचत करने के लिए विभिन्न मोड या सेटिंग फीचर्स उपलब्ध कराते  हैं। प्रमुख टेलीविजन ब्रांडों में ऊर्जा सेवर मोड्स संलग्न होते हैं, जो की बिजली बचाने के क्रम में टीवी की चमक को सीमित रखते हैं। कुछ टीवी में पर्यावरण सेंसर भी होते हैं, जो परिवेश में उचित प्रकाश का संवेदन करके टीवी की चमक को बढ़ाते एवं घटाते हैं और इस प्रकार टीवी द्वारा बिजली की अतिरिक्त खपत को बचाया जा सकता हैं| यहां तक की कंप्यूटर/लैपटॉप के नियंत्रण कक्ष में भी ऊर्जा बचत सेटिंग होती हैं, जिसके उपयोग से एक कंप्यूटर/लैपटॉप स्क्रीन द्वारा बिजली की खपत को सीमित या कम किया जा सकता हैं| मोबाइल फोन/टेबलेट के लिए iOS/एंड्राइड दुकानों पर कई एप्स प्रायः उपलब्ध होते हैं, जो की बिजली की खपत को कम करने और बैटरी जीवन को बढ़ाने के साथ-साथ स्क्रीन की चमक को समायोजित करने में भी मदद करते हैं|

ध्वनि के स्तर का बिजली की खपत पर प्रभाव

एक टेलीविजन द्वारा  बिजली की खपत का परीक्षण करते समय, हमने एक  बदलाव किया – हमने टीवी  की आवाज के स्तर में निरंतर समय-समय में बदलाव किया, उसको बार-बार कम और ज्यादा किया, हमे ये जानकर आश्चर्य हुआ की  ध्वनि के स्तर में वृद्धि करने से बिजली की खपत में भी वृद्धि हुई| हमने यही परीक्षण म्यूजिक सिस्टम और होम थियेटर सिस्टम पर भी दोहराया, और हमे समान परिणाम प्राप्त किया| इसलिए जब आप एक ऑडियो सिस्टम की ध्वनि तेज करेंगे तब बिजली की खपत अधिक होगी  और जब ध्वनि की मात्रा कम करेंगे तब  बिजली की खपत कम होगी। ऐसा परिणाम तर्क बिंदु की भी दृष्टि से काफी तार्किक लगता है, क्योंकि यदि हम अपने आप में कल्पना करके देखे तो हमे चिल्लाने   के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, लेकिन फुसफुसाने के लिए बहुत कम ऊर्जा की जरूरत पड़ती है| इसलिए यदि आप बिजली की खपत को कम करना चाहते हैं एवं मोबाइल की बैटरी को लम्बे  समय तक चलाना चाहते हैं, तब आपको अपने टीवी / ऑडियो सिस्टम / मोबाइल फोन के ध्वनि की मात्रा को कम रखना चाहिए| याद रखें कि हम तभी चिल्लाते हैं, जब हम चाहते हैं कि हमारे पड़ोसी सुने की हम क्या कह रहे हैं| लेकिन जब  हम अपने आप से बात कर रहे होते हैं, तब हम धीरे से ही बोलते हैं | इसलिए, आप अपनी आवाज तभी तेज रखे जब आप चाहते हों की आपके पड़ोसी ये सुने कि आप क्या देख या सुन रहे हैं |

निष्कर्ष

अतिरिक्त उज्ज्वल स्क्रीन और तेज आवाज, न सिर्फ आपके स्वास्थ्य को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करती है बल्कि ये आपके कुल बिजली खपत को भी भली-भाति प्रभावित करती हैं। यह उपयुक्त होगा की हम ना केवल अपने उपकरण की डिफ़ॉल्ट सेटिंग्स को बदलें और उन्हें बेहतर निचले स्तर पर समायोजित करें, जिससे न केवल वे आपकी आँखों और कानो का ध्यान रखे, बल्कि साथ-साथ आपके जेब के लिए भी अच्छा और किफ़ायती सिद्ध हों|

About the Author:
Abhishek Jain is an Alumnus of IIT Bombay with almost 10 years of experience in corporate before starting Bijli Bachao in 2012. His passion for solving problems moved him towards Energy Sector and he is keen to learn about customer behavior towards Energy and find ways to influence the same towards Sustainability. .

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