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इन्वर्टर तकनीक आधारित एयर कंडीशनर बिजली बचाने में मदद कर सकते हैं

By on August 27, 2015 with 20 Comments  

इन्वर्टर तकनीक आधारित एयर कंडीशनर बिजली बचाने में काफी कारगार सिद्ध हो सकते हैं| एयर कंडीशनर, हमारे देश में उन लोगो के लिए, जिन्हे बिजली के बिल के बारे में चिंता रहती हैं, एक गंभीर सोच का विषय हैं| जैसे ही एयर कंडीशनर को हम घर में इस्तेमाल हो रहे उपकरणों की सूची में शामिल करते हैं, बिजली के बिल में काफी वृद्धि होती हैं| हालांकि, यह मुश्किल है कि हम एक एयर कंडीशनर का बिजली के बिल पर पड़े “बड़े” प्रभाव को कम रख पाने में सफल हो पाएं, लेकिन फिर भी सही तकनीक का चयन व सही स्थापना/रखरखाव/संचालन और सही इन्सुलेशन, आदि के द्वारा काफी हद तक हम बिजली के बिल को प्रबंधित कर सकते है|  (अधिक जानकारी के लिए हमारे इस लेख के अंत में सूचीबद्ध दूसरे लेखो को पढ़ें)|

अगर हम तकनीक की बात करें तो कुछ समय पहले तक हमारे पास विकल्पो का अभाव था| हालांकि जब से बीईई ने एयर कंडीशनर का विश्लेषण एवं लेबलिंग के माध्यम से सक्रियता दिखाई हैं, तबसे हमारे पास 5 सितारा एयर कंडीशनर के रूप में अच्छे विकल्पों की भरमार सी आ गई हैं| सबसे कुशल एवं नवीनतम तकनीक से परिपूर्ण जो एयर कंडीशनर आज बाजार में उपलब्ध है, वह हैं इन्वर्टर प्रौद्योगिकी (तकनीक) आधारित एयर कंडीशनर| इन्वर्टर प्रौद्योगिकी का डिज़ाइन-संबंधी खाका ऐसा बनाया गया हैं, कि वह नियमित रूप से 30-50% बिजली खपत का संचय कर सके|

एक एयर कंडीशनर कैसे काम करता है?

ज्यादातर लोगों के लिए, एयर कंडीशनर सिर्फ एक वह सेट मात्र हैं जो तापमान में ठंडी हवा फेंकता है| लेकिन क्या वो वास्विकता में ऐसे ही काम करता है? यह सच है कि  ठंडा करने की प्रक्रिया के दौरान वह आंतरिक हवा अंदर लेता हैं, बाष्पीकरण (एवापोरेशन) के माध्यम से इसे पारित करके उसे ठंडा करता हैं और वापस कमरे में फेंक देता है| हालांकि,  इसका काम करने का अंदाज़ पुराने एयर कूलर्स के काम करने की प्रकिया से काफी विपरीत है| एयर कूलर्स बाहर की हवा अंदर लेते हैं, उसे पानी के माध्यम से ठंडा करते हैं, और फिर अंदर फेंक देते हैं| लेकिन आजकल के एयर कंडीशनर सिर्फ आंतरिक हवा पर काम करते हैं|

साधारण एयर कंडीशनर का कंप्रेसर कैसे काम करता है

कंप्रेसर या तो बंद या चालू होता है, जब वो चालू होता हैं, तब वह पूरी क्षमता के साथ काम करता है और पूरी बिजली की खपत भी करता हैं| जब कमरे का तापमान थर्मोस्टेट में सेट तापमान स्तर तक पहुँच जाता है, तब कंप्रेसर बंद हो जाता है और एयर कंडीशनर का सिर्फ पंखा चलता है| जब तापमान कमरे का दुबारा बढ़ता हैं, और थर्मोस्टेट को इस बड़े हुए तापमान का ज्ञात होता हैं, तब कंप्रेसर फिर से शुरू हो जाता है|

इन्वर्टर प्रौद्योगिकी आधारित एयर कंडीशनर:

इन्वर्टर प्रौद्योगिकी एक कार में लगे त्वरक (एक्सेलरेटर) की तरह काम करती है| जब कंप्रेसर को अधिक बिजली की जरूरत होती है, तब वह इसे और अधिक शक्ति देता है| और जब कंप्रेसर को कम शक्ति की आवश्कता होती हैं, तब वो आवश्कतानुसार कम शक्ति प्रदान करता हैं| इस तकनीक के साथ, कंप्रेसर हमेशा प्रगतिशीग्र रहता हैं| लेकिन कंप्रेसर का कम या अधिक शक्ति को खीचना, इस बात पर भी निर्भर करता हैं, कि उसमे आने वाली हवा का तापमान एवं थर्मोस्टेट में निर्धारित स्तर क्या हैं| इस प्रकार कंप्रेसर की गति और शक्ति को ठीक ढंग से समायोजित किया जाता हैं| इस तकनीक को जापान में विकसित किया गया था और एयर कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर के लिए सफलतापूर्वक वहाँ इस्तेमाल भी किया जा रहा है| यह तकनीक वर्तमान में केवल भाजित (स्प्लिट) एयर कंडीशनर में उपलब्ध है|

इन्वर्टर प्रौद्योगिकी के लाभ क्या है?

हर एयर कंडीशनर एक अधिकतम पीक लोड के लिए बनाया गया है|  इसका मतलब एक 1.5 टन एसी एक निश्चित कमरे के आकार और १ टन एसी एक अलग निश्चित आकार कमरे के लिए बनाया गया है| लेकिन सभी कमरे एक ही आकार के नहीं होते हैं|  एक सामान्य 1.5 टन  क्षमता का एयर कंडीशनर, कंप्रेसर चलने पर, हमेशा नियमित रूप से पीक (शिखर) बिजली  क्षमता की आवश्यकता पर चलेगा| जबकि इन्वर्टर प्रौद्योगिकी पर आधारित एयर कंडीशनर लगातार चलता रहेगा और उतनी ही बिजली आकर्षित करेगा, जितना वांछित स्तर पर स्थिर तापमान बनाए रखने के लिए आवश्यक है|  तो इन्वर्टर प्रौद्योगिकी एक तरह से स्वचालित रूप से, कमरे की आवश्यकता के आधार पर अपनी क्षमता को अनुकूलित कर देता हैं| इस प्रकार बहुत कम बिजली की आवश्कता होती हैं| हालांकि इन्वर्टर प्रौद्योगिकी पर आधारित एयर कंडीशनर कमरे आवश्यकता के आधार पर अपनी क्षमता को समायोजित कर देता है, पर यह भी बहुत महत्वपूर्ण है की हम अपने कमरे में एक सही आकार का एयर कंडीशनर स्थापित करें|  इसलिए, आप खरीदारी करने से पहले यह जरूर सुनिश्चित करें कि आप कमरे और एयर कंडीशनर क्षमता का सही मूल्यांकन कर रहे हैं|

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क्या इन्वर्टर प्रौद्योगिकी आधारित एयर कंडीशनर धीमी गति से ठंडक प्रदान करते हैं?

कई लोगों की यह सोच हैं कि इन्वर्टर प्रौद्योगिकी आधारित एयर कंडीशनर धीमी गति से ठंडक प्रदान करते हैं| इस चिंता को शांत करने के लिए, हम संदर्भ के रूप में इस चित्र को देख कर, यह समझने की कोशिश करते हैं कि इन्वर्टर प्रौद्योगिकी आधारित एयर कंडीशनर कैसे काम करता है|

जो एयर कंडीशनर इन्वर्टर प्रौद्योगिकी पर आधारित नहीं होते हैं, वह निश्चित गति एयर कंडीशनर होते हैं, जबकि इन्वर्टर प्रौद्योगिकी आधारित एयर कंडीशनर परिवर्तनीय  गति  के होते हैं| जो एयर कंडीशनर इन्वर्टर प्रौद्योगिकी पर आधारित नहीं होते हैं, उसमे कम्प्रेसर “ऑन” या “ऑफ” मोड में होते हैं| इन्वर्टर प्रौद्योगिकी आधारित एयर कंडीशनर में कम्प्रेसर हमेशा “ऑन” मोड में रहता हैं| जो एयर कंडीशनर इन्वर्टर प्रौद्योगिकी पर आधारित नहीं होते हैं, उनका लोड पीक लोड पर आधारित (के अनुसार) होता हैं, इस वजह से वे हमेशा अधिक लोड पर चलते हैं  (वास्तव में उनका ख़ाका अधिक गर्मी के मौसम के अनुसार होता हैं)| उसी की वजह से इस प्रकार के एसी हर समय “अधिक ठंडा” करते हैं|  यदि हम एसी तापमान 25 डिग्री पर सेट कर दे, तब भी वह 23 या 22 डिग्री के लिए ही ठंडा करते हैं| और अधिक ठंडा करने के लिए ज़्यादा बिजली की खपत होती है|

अब एक सवाल उत्पन्न होगा: कि थर्मोस्टेट का क्या उपयोग है? थर्मोस्टेट एक गैर इन्वर्टर एसी में कंप्रेसर को बंद करने का काम करता हैं, वह भी जब कमरे का तापमान वांछित स्तर (जैसे 25 डिग्री) तक पहुंच जाता हैं| लेकिन तब तक काफी कुछ हो जाता हैं| एक एसी में रेफ्रिजराँत (कमरे से गर्मी लेने के द्वारा) तरल से गैस में बदलता हैं, और फिर जैसे कंप्रेसर दोबारा उसे जमाता हैं तो वह वापस गैस से तरल में बनता हैं| लेकिन अगर रेफ्रिजराँत अधिक मात्रा में है और कमरे का तापमान (गर्मी) कम है, (जैसा कि अधिक आकार एसी में होता है), तब उसे गैस को तरल में बदलने के लिए कमरे से पर्याप्त गर्मी नहीं मिलती है और अपना तरल रूप ही बरक़रार रखता है|

अब जब थर्मोस्टेट तापमान का सही अंदाज़ा लगाता है और कंप्रेसर को बंद करता हैं, तब भी रेफ्रिजराँत तरल अवस्था में ही रहता है और इस तरह गैस में बदलने के लिए कमरे से और अधिक गर्मी खींचता है, फलस्वरूप कमरे को अधिक ठंडक प्रदान करता हैं|

इसकी तुलना में, इन्वर्टर प्रौद्योगिकी आधारित एयर कंडीशनर कमरे से गर्मी के आधार पर रेफ्रिजराँत के प्रवाह की दर में निरंतर परिवर्तन करता हैं| जब गर्मी कम होती हैं तब प्रवाह का दर भी कम होता हैं, और जब गर्मी अधिक होती हैं तब प्रवाह का दर भी अधिक होता हैं, और यह कभी कंप्रेसर को बंद भी नहीं करता है| इससे यह सुनिश्चित होता है, कि अगर हमारे कमरे का वांछित तापमान स्तर 25 डिग्री है, तो वह उस स्तर पर ही बना रहे|

तो फर्क यह है कि जो एयर कंडीशनर इन्वर्टर प्रौद्योगिकी पर आधारित नहीं होते हैं,  वह अधिक ठंडा करते हैं, जैसा कि चित्र में भी दिखाया गया है|

हालांकि हम यह जरूर कह सकते हैं कि इन्वर्टर प्रौद्योगिकी आधारित एयर कंडीशनर एक अनुकूलित तापमान (ठंड) प्रदान करते हैं, जो की वांछित स्तर (सेट किया हुआ स्तर) के नीचे नहीं जाता हैं| इसी कारण से, लोग यह भी महसूस कर सकते हैं कि इन्वर्टर प्रौद्योगिकी आधारित एयर कंडीशनर अच्छी तरह से अधिक ठंडा नहीं करते या धीरे-धीरे ठंडक पहुचाते हैं|

इन्वर्टर प्रोद्योगिकी एयर कंडीशनर के अन्य फायदे

  • साधारण एयर कंडीशनर को चालू करने में 3-4 गुना ज़यदा करंट लगता है| इस कारण अगर एयर कंडीशनर या फ्रिज को इन्वर्टर पर चलना होता है तो काफी बड़ा इन्वर्टर लगता है| पर इन्वर्टर प्रोद्योगिकी वाले एयर कंडीशनर या फ्रिज की मोटर चालू होने के लिए काफी काम करंट लेती है| इस कारण अगर आपको एयर कंडीशनर या फ्रिज अगर इन्वर्टर से चलना होता है तो वह छोटे इन्वर्टर से भी चल सकता है| जैसे की अगर आप के पास एक 1.5 टन का साधारण एयर कंडीशनर है जो साधारण तौर पर 10 एम्प करंट लेता है पर वह चालू होने के लिए 30 एम्प करंट लेगा| अगर आप को ऐसा एयर कंडीशनर बिजली इन्वर्टर पर चलना है तो आप को 5 केवीए इन्वर्टर लगेगा| पर अगर आप के पास 1.5 टन का इन्वर्टर एक है तो वह चालू होने के लिए भी 10 एम्प से ज़्यादा का करंट नहीं लेगा| और इसका मतलब है की वह 2 केवीए बिजली इन्वर्टर से भी चल जायेगा| कृपया ध्यान दें इन्वर्टर प्रोद्योगिकी एयर कंडीशनर और हमारे घरों में जो बिजली के इन्वर्टर हैं वह बिलकुल अलग हैं| इन्वर्टर प्रोद्योगिकी वाले एयर कंडीशनर के लिए अलग से इन्वर्टर खरीदना ज़रूरी नहीं है|
  • साधारण मोटर का शक्ति गुणक या पावर फैक्टर काफी काम होता है जो की औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली बिल के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है| इन्वर्टर प्रोद्योगिकी वाले एयर कंडीशनर में शक्ति गुणक या पावर फैक्टर 1 के आस पास होता है जिससे न केवल बिजली की बचत होती है बल्कि बिजली के बिल में भी कमी होती है|
  • अगर आप सौर ऊर्जा का उपयोग अपने एयर कंडीशनर या फ्रिज को चलने के लिए करना चाहते हैं तो उसके लिए भी इन्वर्टर प्रोद्योगिकी वाला एयर कंडीशनर या फ्रिज सबसे अच्छा होता है| क्यूंकि वह चालू होने के लिए काम बिजली लेता है और चलने में भी काम बिजली लेता है इस कारण से अगर आप सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो आप का काम कम पेनल्स और छोटे इन्वर्टर से भी चल सकता है (जो की साधारण एयर कंडीशनर या फ्रिज में बड़े इन्वर्टर और ज़्यादा पेनल्स से होगा)|
About the Author:
Abhishek Jain is an Alumnus of IIT Bombay with almost 10 years of experience in corporate before starting Bijli Bachao in 2012. His passion for solving problems moved him towards Energy Sector and he is keen to learn about customer behavior towards Energy and find ways to influence the same towards Sustainability. .

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