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बिजली के बिल पर ईंधन समायोजन शुल्क को समझना

By on August 27, 2015 with 10 Comments  

क्या आपने कभी सोचा है की आपके बिजली के बिल की राशि समान क्यों नहीं होती है, वह भी  तब जब आपके बिल में खपत इकाइयों की संख्या समान होती है? ऐसा क्यों है कि आपने बिजली की खपत में बदलाव नहीं किया है, लेकिन तब भी बिजली का बिल भिन्न होता है? यदि आप अपने बिजली के बिल पर नजर डालेंगें तो पायेगें की एफएसी, एफसीए या एफपीपीसीए के रूप में एक राशि का उल्लेख किया गया है, जो की अन्यतर सकारात्मक या नकारात्मक होता है और वही जिम्मेदार होता हैं ज़रूरी अंतर पैदा करने में|

एफएसी/एफसीए या एफपीपीसीए क्या है?

एफएसी (ईंधन समायोजन प्रभार) या एफसीए (ईंधन लागत समायोजन) या एफपीपीसीए (ईंधन और बिजली खरीद लागत समायोजन), वह राशि है जो की बिजली वितरक कंपनी द्वारा  ईंधन या कोयले की अलग-अलग कीमत के आधार पर बिल में लागू होने वाली अतिरिक्त राशि होती है| कोयला या ईंधन की कीमत कोयले की मांग और आपूर्ति के आधार पर हर महीने बदलती है और तदनुसार बिजली के उत्पादन की लागत भी इस प्रकार बदल जाती है| बिजली उत्पादन कंपनियां इस लागत को वितरण कंपनियों पर लगाती है, जो इसे उपभोक्ताओं पर लगा देते हैं|

एफएसी टैरिफ स्लैब में क्यों नहीं शामिल है?

विभिन्न राज्यों के विद्युत विनियामक आयोग समय-समय पर भारत में बिजली के लिए शुल्क तय करते रहते हैं| संशोधन हर कुछ सालों (कुछ मामलों में हर साल) में होता रहता है और एक नया टैरिफ बिजली के उत्पादन और वितरण की लागत के आधार पर निर्धारित होता है| लेकिन ईंधन या कोयले की कीमतें साल भर परिवर्तित होती रहती हैं और बिजली वितरण कंपनियां  इसे उपभोक्ताओं पर लगा कर इस अतिरिक्त बड़ी हुई राशि को समायोजित करते हैं|

एफएसी कितनी बार परिवर्तित होता है?

यह हर एक राज्य के लिए अलग होता है| मुंबई जैसे कुछ स्थानों में, एफएसी की गणना हर महीने की जाती है| अधिकांश राज्यों में यह त्रैमासिक (तिमाही पर) होती है| मध्य प्रदेश में यह अर्ध-वार्षिक और पश्चिमबंगाल में यह वार्षिक होती है। छत्तीसगढ़ और त्रिपुरा जैसे कुछ राज्यों में यह समय-समय पर जरूरत के आधार पर संशोधित की जाती है| अगर नया टैरिफ नियमित रूप से ठीक प्रकार परिभाषित नहीं होता हैं, इस हालत में बिजली के बिल में एफएसी घटक बिजली टैरिफ राशि के रूप में बराबर हो सकता है।

एफएसी की गणना कैसे की जाती है?

हर राज्य में एफएसी राशि की गणना करने के लिए एक अलग सूत्र होता है| हम इस जानकारी को एकत्रित करने की प्रक्रिया में लगे हैं| जैसे ही हम इस जानकारी को प्राप्त करेंगे, हम बिजली बचाओ के पाठकों को इस बारें में अद्यतन करेंगे|

एफएसी हमारे बिजली के बिल को कैसे प्रभावित करता है?

एफएसी प्रति यूनिट बिजली की खपत पर लागू होने वाला शुल्क होता है| निर्धारित शुल्क के विपरीत यह बिजली के बिल का एक चर घटक है और आपके प्रति महीने बिजली की खपत के अनुसार परिवर्तित होता रहता है| कई बार यह नकारात्मक भी होता है, लेकिन ज्यादातर यह सकारात्मक ही होता है| बिजली की मासिक खपत में थोड़ी सी कमी भी निश्चित रूप से इस घटक की राशि को कम करने में मदद करती हैं| इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि आप बिजली बचाओ को पढ़ना जारी रखें और अपने बिजली की खपत को कम करें|

About the Author:
Abhishek Jain is an Alumnus of IIT Bombay with almost 10 years of experience in corporate before starting Bijli Bachao in 2012. His passion for solving problems moved him towards Energy Sector and he is keen to learn about customer behavior towards Energy and find ways to influence the same towards Sustainability. .

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