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घर और ऑफिस के लिए सही रूफ टॉप सोलर पीवी प्रणाली परियोजना का चुनाव

By on August 27, 2015 with 53 Comments  

कोयला के माध्यम से बिजली उत्पन्न करना, हर बीतते समय के साथ महंगा होता जा रहा है| इसके साथ ही बिजली कटौती और फलस्वरूप डीजी सेट पर बढ़ती निर्भरता पर्यावरण को बहुत नुकसान तो पहुँचाती ही हैं| आये दिन, बिजली की मांग और आपूर्ति में अंतर भी बढ़ता जा रहा हैं, जो लोगों को अपनी ऊर्जा जरूरतों को साकार करने के लिए विभिन्न तकनीकों के बारे में सोचने के लिए प्रेरित कर रहा है| इसे ध्यान में रखते हुए, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) भी देश में जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सोलर मिशन के तहत ऑफ ग्रिड सोलर पीवी प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए उपयुक्त कदम उठा रहा हैं| देश में बहुत से लोग अपने घर, अपार्टमेंट, परिसर या कार्यालयों में उपयोग के लिए सोलर पीवी प्रणाली को स्थापित करने की जरूरत महसूस कर रहे हैं| भारत में सोलर पैनल खरीदने के इच्छुक लोगों की मदद करने के लिए हमने इस लेख में एक शोध प्रस्तुत किया हैं, जो की ऑफ ग्रिड सोलर पीवी प्रणाली को जानने, वह उसका बेहतर उपयोग करने के लिए एक बहुत अच्छा प्रारंभ-बिंदु भी बन सकता हैं|

एक सोलर पीवी सेल और मॉड्यूल क्या होते है?

सोलर पीवी सेल एक पीवी प्रणाली के निर्माण मूलखंड होते है| यह सेमीकंडक्टर पदार्थ से परिपूर्ण होते हैं, बिजली उत्पन्न करने के लिए यह सूर्य के प्रकाश को सोख लेते है, इस सिद्धांत को हम “फोटोइलेक्ट्रिक प्रभाव” कहते हैं| सूर्य के प्रकाश की एक निश्चित तरंगदैर्ध्य (वेवलेंथ) ही प्रभावी ढंग से बिजली उत्पन्न कर सकने में समर्थ होती हैं| हालांकि एक सोलर पीवी उस दिन भी बिजली उत्पन्न कर सकने में सक्षम होती हैं, जिस दिन आसमान में बादल छाएं होते हैं, लेकिन यह सूर्य के प्रकाश (धूप) के साथ एक उज्ज्वलित दिन के मुकाबले कहीं कम प्रभावी सिध्द होता हैं|

एक नियमित पीवी सेल काफी कम मात्रा में बिजली उत्पन्न करता हैं, इसलिए उनमें से कई एक साथ जोड़ या एकत्र  कर सोलर पीवी मॉड्यूल बनाते हैं| इन सोलर पीवी मॉड्यूल से 10 वाट से 300 वाट तक बिजली उत्पन्न हो सकती हैं| अधिक बिजली की आवश्यकता पड़ने पर इन पीवी मॉड्यूल को एक सरणी (ऐरे) में स्थापित किया जाता हैं|

एक सोलर सेल को बनाने के लिए विभिन्न प्रकार की सामग्री का उपयोग किया जाता है, और सोलर सेल की कार्यकुशलता भी काफी हद तक उसी पर निर्भर करती हैं| सोलर सेल की कार्यकुशलता, सूरज की रोशनी को एक निश्चित मात्रा में बिजली में परिवर्तित करने की दक्षता पर भी निर्भर करता है| बाजार में उपलब्ध सोलर सेल विभिन्न क्षमता के होते हैं जैसे 4%, 8%, 12%, 14% और 16%| एक सोलर पीवी मॉड्यूल का आकार, उसकी उत्पादन और क्षमता पर निर्भर करता है|

छत के वर्ग क्षेत्र में आवश्यक फुट  

पीवी मॉड्यूल क्षमता (%)पीवी क्षमता रेटिंग (वाट)
10025050010002000400010000
4307515030060012003000
81538751503006001200
121025501002004001000
168204080160320800

उदाहरण के तौर पर, एक 12% कुशल प्रणाली से 2000 वाट बिजली उत्पन्न करने के लिए, आपको 200 वर्ग फुट छत के वर्ग क्षेत्र की जरूरत पड़ती हैं| (स्रोत: solar PV sizing  information on energysavers.gov)

NSM (राष्ट्रीय सोलर मिशन) के तहत स्वीकृत “सोलर घर प्रकाश व्यवस्था” के लिए एक निश्चित स्तर कार्यक्षमता पूर्ण निर्धारित की गई हैं| सीएफएल आधारित सोलर प्रणाली मॉड्यूल को   14% और उससे अधिक की मॉड्यूल दक्षता की आवश्यकता होती है और एक एलईडी आधारित सोलर प्रणाली को 12% या उससे ऊपर की दक्षता आवश्यक होती हैं| कृपया ध्यान दें, कि ऐसी व्यवस्था एक सीरियल नंबर फ्रेम पर उत्कीर्ण NSM के साथ ही शुरू होती हैं|

सोलर प्रणाली की आकार संबंधित छँटाई

जब आप एक सोलर सिस्टम को खरीदते हैं, तब यह महत्वपूर्ण होता हैं की आप उसकी ठीक से आकार संबंधित छँटाई कर ले, यह आपके सेटअप में लोड आवश्यकताओं पर निर्भर करता हैं| यहाँ यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है, कि एक सोलर प्रणाली कम वाट क्षमता के उपकरणों जैसे लाइट, पंखे, टीवी आदि के संचालन के लिए ही अच्छी है| उच्च वाट क्षमता पर आधारित उपकरण, जैसे एयर कंडीशनर और वॉटर हीटर को सोलर प्रणाली पर संचालित नहीं किया जा सकता है| यह सुनिश्चित करना भी बहुत महत्वपूर्ण है, कि आपके सोलर प्रणाली सिस्टम ऊर्जा कुशल हो, और वह एक बड़े आकार सोलर प्रणाली सिस्टम की जरूरत को अच्छीं तरह से पूरी कर सकने में पूर्णता से सक्षम हो| कृपया हमारे पिछले लेख को पढ़े: नवीकरणीय ऊर्जा (रेनेवाबलेस) से पहले ऊर्जा दक्षता को जाने| आपके घर में आपकी जरुरत के मुताबिक लोड, प्रणाली के आकार का निर्धारण करने में मदद करेंगे और वह प्रणाली की सही लागत का निर्धारण करने में भी मदद करते हैं|




एक सोलर प्रणाली स्थापित करने के लिए अन्य प्रमुख विचार

एक सोलर पीवी प्रणाली प्रत्यक्ष या दूर-दूर तक विस्तृत सूर्य के प्रकाश के माध्यम से बिजली उत्पन्न कर सकती  हैं| हालांकि यह महत्वपूर्ण है कि, हम उस स्थान पर जहाँ हम एक सोलर पैनल को स्थापित कर रहे हैं, वहां पर उपलब्ध सूरज की रोशनी की मात्रा का सही आकलन करें| अधिकतम सूर्य के प्रकाश को इकट्ठा करने के लिए एक सोलर पैनल का आदर्श छोर दक्षिण की ओर होना चाहिए| हालांकि अगर आदर्श कोढ़ न मिल पाएं तब, दक्षिण से 45 डिग्री पूर्व या पश्चिम कोढ़ से भी काम चलाया जा सकता हैं| सोलर पैनल का उन्मुखीकरण ऐसा होना चाहिए की वहां कोई पेड़ या आसपास के निर्माण द्वारा कोई बाधा न हों| अगर यह आवश्यकताएं पूरी नहीं हो रहीं हो तो, हमे एक विशेषज्ञ द्वारा उपलब्ध सूर्य के प्रकाश की मात्रा का विस्तृत विश्लेषण करा लेना चाहियें|

छत भी सोलर पैनल के भार को संभालने में सक्षम होनी चाहिए, इसलिए उसकी वहन लोड क्षमता का भी परीक्षण करा लेना चाहिए| आमतौर पर एक सोलर पैनल का वजन 15 किलोग्राम प्रति वर्ग मीटर होता हैं| अपने स्थान से सोलर पैनल का झुकाव भी एक जरूरी विचार है| यह आवश्यक है, कि सोलर पैनल का झुकाव आपके स्थान के अक्षांश (व्याप व लतितुते) जितना ही हो|

एक सोलर प्रणाली से उत्पन्न कुल बिजली इकाइयों का उत्पादन

हालांकि, हम यहाँ एक सोलर पीवी प्रणाली की वाट क्षमता के बारे में बात कर रहे हैं,  लेकिन इसका यह मतलब  कतई नहीं हैं कि, हमे वर्ष भर यह वाट क्षमता 24 घंटे मिलेगी| एक सोलर पैनल की इकाइयां या kWh उत्पादन क्षमता, एक स्थान में पैनल दक्षता और सूर्य के प्रकाश की उपलब्धता पर निर्भर करता हैं| जो कारक, इस उत्पादन को परिभाषित करता है उसे CUF (या क्षमता उपयोगिता फैक्टर) कहा जाता है| भारत के लिए यह आम तौर पर 19% के रूप में लिया जाता है|

बिजली इकाइयों का सालाना उत्पादन (kWh में) = प्रणाली आकार (किलोवाट में) * CUF * 365 * 24

तो आम तौर पर एक 1 kW क्षमता सोलर मंडल प्रतिवर्ष औसतन बिजली की 1600-1700 किलो वाट घंटा (kwh) इकाई उत्पन्न करता हैं (कृपया ध्यान दें, की यह केवल एक नियम है, क्यूंकि CUF के रूप भारत के विभिन्न शहरों में अलग अलग होंगे)|

एक छत के ऊपर पीवी प्रणाली के घटक

एक नियमित छत के ऊपर लगा हुआ पीवी प्रणाली सिस्टम, एक बैटरी का सेट व इन्वर्टर से सुसज्जित होता हैं| एक सोलर पीवी सिस्टम का सबसे प्रभावी उपयोग के लिए सही घटकों का चयन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है| प्रणाली के समग्र कार्यकुशलता भी इस्तेमाल में लाई गई बैटरी और इनवर्टर के प्रकार पर निर्भर करती हैं|

“डीप साइकिल” बैटरियां (आम तौर पर लेड-एसिड), सोलर पीवी प्रणाली के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती हैं| आमतौर पर ये बैटरियां 5 से 10 साल के लिए बिजली उपलब्ध कराने में समर्थ होती हैं| इनकी कार्यकुशलता 80 फीसदी होती हैं (यह अपनी 80% संग्रहित ऊर्जा को पुनः प्राप्त कर सकने में समर्थ होती हैं)| ये बैटरियां भी लंबी अवधि के लिए बिजली उपलब्ध कराने में सक्षम होती हैं और बार-बार अपनी क्षमता का 80 फीसदी तक का निर्वहन कर सकती हैं|  ऑटोमोटिव बैटरियां, जो उथले चक्र के होते हैं, उनका अमूमन प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए|

सीलबंद व रखरखाव मुफ्त ट्यूबलर पॉजिटिव प्लेट बैटरियां भी सोलर पीवी प्रणाली के लिए अच्छीं मानी जाती हैं|

बैटरियों का आकर निर्धारण करना अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, ताकि वह ना केवल पर्याप्त बिजली का संग्रह कर सके बल्कि वे मेघमय (क्लोऊडी, बादल युक्त) मौसम के दौरान अपनी आवश्यकताओं को भलीभाति पूरी कर सकें| बैटरियां अमूमन ऐसी जगह रखी जानी चाहिए जहाँ उनका रखरखाव आसानी से हो सकें,  उनका रखने का स्थान अच्छी तरह से हवादार और तीव्र मौसम से रक्षा करने में सक्षम होना चाहिए|

यहां तक ​​कि इनवर्टर भी 100 फीसदी कुशल नहीं होते हैं, और इसके लिए हमारे लिए महत्वपूर्ण है, कि हम कम से कम 85 फीसदी कुशल इनवर्टर का चयन करें (अगर इनवर्टर प्रणाली राष्ट्रीय सोलर मिशन के तहत खरीदी गयी है, तो इन मानकों की गारंटी होती है)| संशोधित साइन वेव या शुद्ध साइन वेव इनवर्टर, सोलर पीवी प्रणाली के लिए अनुकूल माने जाते है| संशोधित साइन वेव  हालांकि सस्ते होते हैं, पर उनकी कार्यक्षमता कम होती हैं| इन इन्वेर्टरो से गर्मी के रूप में बिजली का भी काफी ह्रास होता हैं|  इन उपकरणों से एक बज्ज (भनभनाहट) जैसी ध्वनि बराबर उत्पन्न होती रहती हैं| शुद्ध साइन वेव इनवर्टर हालांकि महंगा इनवर्टर सिस्टम होता हैं, परन्तु  इसकी कार्यकुशलता सबसे अधिक होती हैं| यह हर तरह के उपकरणों को चलाने के लिए अति सक्षम भी होते हैं|

एक सोलर पीवी प्रणाली के लिए वारंटी और रखरखाव की आवश्यकताये

NSM द्वारा खरीदी गई एक सोलर पीवी मॉड्यूल, आपूर्ति की तिथि से 25 वर्ष की वारंटी के साथ आता है| एक सोलर घर प्रकाश सिस्टम 5 साल की वारंटी के साथ आता है, रखरखाव मुक्त सील बैटरीया 2 साल की वारंटी के साथ आती हैं और लेड एसिड से भरी बैटरीया 5 साल की वारंटी के साथ आतीं हैं|

सभी विद्युत और यांत्रिक उपकरण-समूह के साथ, एक सोलर पीवी प्रणाली सिस्टम भी उचित और नियमित रखरखाव मांगता हैं| एक कुशल प्रणाली को ठीक से लंबे समय तक चलाने के लिए उचित और नियमित रखरखाव की बहुत जरूरत होती हैं| यह महत्वपूर्ण है, कि सोलर पैनल व पीवी मॉड्यूल के निर्माता ऑपरेशन, निर्देश और रखरखाव संबंधित साहित्य पुस्तिका अंग्रेजी में तथा स्थानीय भाषा में प्रकाशित करें| हालांकि, एक सोलर पीवी प्रणाली को रखरखाव की बहुत अधिक जरूरत नहीं होती है, पर उसकी कार्यकुशलता को बढ़ाने के लिए नियमित रूप से धूल और पक्षी गोबर जैसे गर्द से सिस्टम को साफ करने की जरूरत पड़ती रहती हैं| अगर आप रखरखाव मुक्त (मेंटेनेंस फ्री) बैटरी चुनते हैं तो आपको बैटरी के बारें में ज्यादा परेशान होने की जरुरत नहीं हैं| आप यह भी सुनिश्चित करें जहाँ प्रणाली स्थापित हैं, वहां पर्याप्त सूरज की रोशनी आ रहीं हो और आस पास पेड़ आदि से जगह छायांकित न हो|

सोलर पीवी प्रणाली की लागत और एमएनआरई द्वारा प्रोत्साहन जानकारी

सोलर पीवी उद्योग में अपने स्रोतों के अनुसार, एक पीवी मॉड्यूल (सिर्फ पैनल) की लागत अमूमन 30 रुपये से 60 रुपये प्रतिवाट के बीच होती हैं|  एक अच्छा आयातित मॉड्यूल भी लगभग 40-45 रुपये प्रतिवाट के बीच पड़ता हैं| भारत में निर्मित अच्छे गुणपूर्णता पीवी मॉड्यूल का मूल्य करीब 30-32 रुपये प्रति वाट का पड़ता हैं| कृपया ध्यान दें, की यह मूल्य सिर्फ पीवी मॉड्यूल के हैं, अगर हम इन्वर्टर एवं बैटरीज की लागत जानना चाहते हैं, तो इसकी लागत अतिरिक्त होगी| एक अच्छा 5 किलोवाट प्रणाली घरेलू सिस्टम करीब 5-7 लाख का पड़ेगा, यह घर के लिए 25 साल तक बिजली प्रदान करने में सक्षम होता हैं| अतिरिक्त ऑपरेटिंग लागत में बैटरी का प्रतिस्थापित (बदलने का) खर्च भी शामिल होता हैं|

एमएनआरई 100 किलोवाट तक की छत सोलर प्रणाली परिपूर्ण वाणिज्यिक एवं आवासीय संस्थाओं  के लिए 30% पूंजी सब्सिडी प्रदान करता है| भारत सरकार वाणिज्यिक और आवासीय संस्थाओं के लिए, उसके 50% पूंजीगत व्यय को पूरा करने के लिए 5 वर्षो तक, 5% प्रतिवर्ष की दर पर ऋण भी उपलब्ध कराती हैं| जिसपर, वाणिज्यिक संस्थान पूंजी या ब्याज पर दावा कर सकते हैं|

आप कहाँ से सोलर पीवी प्रणाली खरीद सकते हैं?

अधिकृत आपूर्तिकर्ताओं/निर्माताओं की सूची एमएनआरई लिंक पर उपलब्ध है: (http://mnre.gov.in/file-    manager/UserFiles/list_manufacturers_SPV_NABARD-part-I.pdf)

About the Author:
Abhishek Jain is an Alumnus of IIT Bombay with almost 10 years of experience in corporate before starting Bijli Bachao in 2012. His passion for solving problems moved him towards Energy Sector and he is keen to learn about customer behavior towards Energy and find ways to influence the same towards Sustainability. .

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