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भारत सौर फोटोवोल्टिक (पीवी) पैनल चयन गाइड- प्रणाली गुणवत्ता की समझ

By on August 27, 2015 with 2 Comments  

हमारा देश उन कुछ चुनिंदा देशो में से एक हैं, जहाँ सौर ऊर्जा प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं| इसके साथ ही भारतीय सौर बाजार में विकास के लिए जबरदस्त गुंजाइश भी मौजूद है| हालांकि, वह दो प्रमुख कारक जो भारत में सौर ऊर्जा के विकास को प्रभावित करते हैं, वह हमारे अनुसार हैं — उपभोक्ताओं के बीच सौर ऊर्जा प्रौद्योगिकी के बारे में उचित ज्ञान का अभाव और भारतीय बाजार में ‘बहुत अच्छे गुणवत्ता नहीं’ वाले उत्पादों की पैठ| इसलिए, बिजली बचाओ पर हमने लेखो की एक श्रृंखला सौर ऊर्जा प्रौद्योगिकी विचार से शुरू की हैं, जहां हम सौर ऊर्जा प्रौद्योगिकी के बारे में विभिन्न अवधारणाओं का पता लगाने के लिए अपनी तरफ से पूरी कोशिश करेंगे और उपभोक्ताओं को अच्छी गुणवत्ता वाले उत्पादों की संपूर्ण जानकारी देने में मदद भी करेंगे|

सर्वप्रथम हम सौर फोटोवोल्टिक प्रणाली के बारे में संपूर्ण निरीक्षण से शुरू करते हैं| इसको और अच्छी तरह से समझने के लिए कृपया इस वीडियो पर एक नजर डालें:

(ऊपर दिखाया गया वीडियो एक सौर पीवी प्रणाली में घटकों के बारें में उचित जानकारी देता है, वास्तविक कार्य प्रणाली भिन्न-भिन्न सिस्टम के लिए अलग होती है| आगे समझने के लिए हमारे लेख: सौर बिजली, सौर तापीय, विद्युत उत्पादन, इनवर्टर, ग्रिड ऑफ ग्रिड को देखें|)

इस लेख में हम सौर फोटोवोल्टिक (पीवी) पैनलों पर ध्यान केंद्रित करेंगे|

‘फोटोवोल्टिक’ – यह क्या होता है?

एक लाइन में समझाने के लिए: फोटोवोल्टिक प्रकाश (फोटॉनों) का बिजली (वाल्ट) में रूपांतरण होता है|

उन सभी जिज्ञासु लोगों के लिए जो यह जानने में इच्छुक हैं की यह वास्तव में यह कैसे काम करता है, और आपको भी इस प्रक्रिया को बेहतर तरीके से समझने में मदद करने के लिए हमने यू-ट्यूब से एक वीडियो को शामिल किया है|

आप यहाँ भी समझ सकते हैं :

तकनीकी रूप से अधिक जिज्ञासु व्यक्ति, यह वीडियो देखें:

फोटोवोल्टिक पैनल के विभिन्न प्रकार:

किसी एक फोटोवोल्टिक प्रकार को गहराई में जाने बगैर, आप नीचे दी गई तालिका से विभिन्न प्रकार के सौर फोटोवोल्टिक पैनलों के बीच एक विश्वसनीय तुलना कर सकते हैं:




क्रमांक

विशेषता

मोनो क्रिस्टलीय

मल्टी /पॉलीक्रिस्टलीय

Thin Film (CdTe, CIGS, अमोर्फोस क्रिस्टलाइन, आदि)

1

क्षमता

उच्चतम

मध्यम (13-15%)

न्यूनतम

2

लागत

उच्चतम

मध्यम

न्यूनतम

3

क्षेत्र अधिकृत प्रति किलोवाट

न्यूनतम

मध्यम (लगभग 100 वर्ग फुट)

उच्चतम

4

उच्च तापमान निष्पादन

बहुत खराब

बहुत खराब

बेहतर

5

विसरित प्रकाश में जनरेशन

औसत

औसत

बेहतर

भारत में सबसे अधिक एवं सुलभ फोटोवोल्टिक (पीवी) पैनल उपलब्ध हैं — पॉलीक्रीस्टलीय/बहु क्रिस्टलीय पैनल|

अब हम गुणवत्ता के आधार पर सौर पीवी पैनल को विभाजित करने वाले कारकों को जानने से पहले भारतीय परिस्थितियों के आधार पर सौर पैनल के प्रदर्शन को प्रभावित करने वाले कारकों का विश्लेषण करते हैं|

क्रमांक

कारक

टिप्पणियाँ

1

दिशाजिन पैनल की बिना किसी सूरज ट्रैकिंग प्रणाली के लिए एक स्थिति तय होती है, उनको बेहतर आउटपुट के लिए साल भर दक्षिण दिशा ही फेस करनी चाहिए|

2

झुकाव/झुकाव का कोण

विशेषतः जगह के अक्षांश के अनुसार

3

छायांकन

छायांकित पैनल का एक छोटा सा हिस्सा भी पैनल के पूरे उत्पादन को काफी हद तक प्रभावित करता है| हम यह सुनिश्चित करें की हम पैनल को इस तरह रखे की दिन भर में उस पर कोई छाया ना पड़े| यहां तक ​​कि एक भी आंशिक रूप से छायांकित पैनल पूरे उत्पादन को प्रभावित करता है| इसके अलावा, शेडिंग से बचने के लिए हमे यह भी सुनिश्चित करना चाहिए की पैनल पर कोई गंदगी, धूल, आदि ना हो|

4

तापमान

जितना अधिक तापमान होगा, सौर पैनल से उतना ही कम उत्पादन मिलेगा| आमतौर पर, पैनल का मूल्यांकन मानक परीक्षण परिस्थितियों के अनुसार होता हैं (यानी तापमान: 25 डिग्री सेल्सियस, इन्सोलेशन (आतपन) 1,000 W/m2, एयर मास्स: 1.5). इसलिए, अगर तापमान इस तुलना में अधिक है, आपके पैनल का उत्पादन अनुमति सीमा से कम हो सकता है|

आईये अब हम समझते हैं की किस प्रकार हम सौर पीवी पैनल की डेटाशीट को देखते हुए पैनल की गुणवत्ता का निर्धारण कर सकते हैं| इसलिए हम पाठकों से अनुरोध करते हैं की वे जिस पैनल को खरीदने की इच्छा रखते है, उसकी डेटाशीट के लिए निर्माता से पूछे और निम्नलिखित कारकों की जाँच पड़ताल अवश्य कर लें|

सौर पैनलों की सहनशीलता: अधिक वादा और कम वितरण स्वीकार्य नहीं होता हैं

अगर सौर पैनल 100 वाट रेटेड होते हैं, तो उसे मानक परीक्षण परिस्थितियों में कम से कम 100 वाट का उत्पादन देना चाहिए| हालांकि, अगर निर्माता कहते हैं कि उनका पैनल +/- 5% की सहिष्णुता (टोलेरैंस) का हैं, इसका मतलब हैं की वह पैनल या तो 105 वाट (स्वीकार्य उत्पादन) या फिर 95 वाट (अस्वीकार्य उत्पादन) दे सकता हैं| हमे यह सुनिश्चित करना चाहिए की हमारा सौर पैनल हमेशा ‘ सकारात्मक सहिष्णुता’ का ही हो, जिसका उल्लेख उसकी डेटाशीट में भी होता हैं|

सौर पैनलों का तापमान गुणांक: स्थिरता को हमेशा पसंद किया जाता हैं

जैसा कि ऊपर भी कहा गया हैं की, तापमान से सौर पैनल का आउटपुट प्रभावित होता है |

जैसे ही तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से अधिक होता है, करंट बढ़ता है, वोल्टेज कम होता है, ऊर्जा शक्ति भी कम हो जाती है| इसके विपरीत क्रम भी कुछ इसी प्रकार से हैं|

अब उस सीमा तक जहाँ इस प्रकार की वृद्धि/कमी होती हैं, उसे तापमान गुणांक के रूप में दर्शाया गया हैं, तापमान गुणांक प्रतिशत तापमान परिवर्तन के रूप में होता हैं – परिवर्तन प्रति तापमान परिवर्तन का प्रतिशत (जैसे की पावर परिवर्तन = -0.04%/डिग्री सेल्सियस)| इसलिए अगर, मानिये तापमान 40 डिग्री सेल्सियस है, तो इसका मतलब 25 डिग्री सेल्सियस तापमान से कुल तापमान वृद्धि 15 डिग्री सेल्सियस की ही हुई हैं| इसलिए, ऊर्जा में 15*0.04% की दर से कमी होगी, जो की मूल्यांकित शक्ति का 0.6% होता है| इसप्रकार, ऊर्जा तापमान गुणांक जितना कम होता हैं, सौर पैनल अलग-अलग ऑपरेटिंग परिस्थितियों में उतना ही बेहतर स्थिरता प्रदान करते हैं|

सौर पैनल की क्षमता: कम जगह में अधिक कुशल और अधिक ऊर्जा

सौर पैनलों की क्षमता का मूल्यांकन, उसके द्वारा प्रति वर्ग मीटर क्षेत्र में किये गए बिजली के उत्पादन की मात्रा से निर्धारित होता हैं, जब सौर विकिरण उस जगह पड़ता हैं| उदाहरण के लिए, एक 14% क्षमता वाले सौर पैनल और 1.5 मीटर वर्ग वाले क्षेत्र को लेते हैं| अब अगर इस पैनल पर गिरने वाली सौर विकिरण की मात्रा 1,000 वाट मीटर वर्ग हैं, तब इस पैनल के उत्पादन क्षमता, 1,000 *14%*1.5 = 210 वाट है|

यदि यह ऊर्जा 5 घंटो के लिए रहती है, तो यह पैनल से एक दिन में 210 *5 = 1,050 वाट घंटा या 1.05 किलो वाट घंटा का उत्पादन करेगा| जितनी उच्च क्षमता होगी, प्रति इकाई क्षेत्रफल में उतनी ही उच्च ऊर्जा उत्पन्न होगी| इसलिए दक्षता ऐसे मामलों में एक प्रमुख भूमिका अदा करती हैं| अगर आपके पास सौर पैनल की स्थापना के लिए सीमित जगह है, तो इससे पैनल की क्षमता प्रभावित होगी, ऐसी स्थिति में उच्च क्षमता वाले सौर पैनल का उपयोग बेहतर रहेंगा|

सौर पैनल के लिए स्वीकृति/प्रमाणपत्र : एक बहुत ही महत्वपूर्ण कारक

स्वीकृति और प्रमाणन बहुत महत्वपूर्ण कारक होते हैं, क्यूंकी ये ही सुनिश्चित करते है की सौर पैनल प्रदर्शन और सुरक्षा की न्यूनतम आवश्यकताओ की पूर्ति कर रहे हैं या नहीं| यह पहलू महत्वपूर्ण होता हैं, क्यूंकि यह स्पष्ट रूप से बहुत कम गुणवत्ता वाले उत्पादों की समाप्ति का मार्ग प्रशस्थ करता हैं| भारत में नई और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई), सौर पैनलों के लिए निम्नलिखित प्रमाणपत्र जारी करती हैं:

  • क्रिस्टलीय सिलिकॉन स्थलीय पीवी मॉड्यूल के लिए: IEC 61215/ IS 14286
  • थींन फिल्म स्थलीय पीवी मॉड्यूल के लिए: IEC 61646
  • इसके अलावा, पैनलों को IEC 61730 पार्ट I, परीक्षण एवं सुरक्षा योग्यता की आवश्यकताओं के अनुरूप होना चाहिए|
  • अत्यधिक संक्षारक वातावरण (तटीय क्षेत्रों, आदि) के लिए पैनलों को IEC 61701/ IS 61701 साल्ट मिस्ट कोरीजन टेस्टिंग के आवश्यकताओं के अनुरूप होना चाहिए|

कृपया अपने सप्लायर से इन परीक्षण प्रमाण पत्र को दिखाने के लिए कहे और इन प्रमाण पत्र की वैधता की जांच भी अवश्य करें| अगर गुणवत्ता असली है, तो इन प्रमाण पत्रो को प्राप्त करना सप्लायर के लिए मुश्किल नहीं होगा।

वारंटी और सौर पैनलों की गारंटी: उत्पाद में आत्मविश्वास को दर्शाता है

क्यूंकी आप सौर ऊर्जा प्रणाली को स्थापित करने के लिए पहले ही से एक अच्छी रकम का निवेश कर चुके हैं, इसलिए यह विश्वास तो आप कर ही लें की यह प्रणाली कम से कम अगले 15-20 वर्षों के लिए ठीक-ठाक ढंग से जरूर काम करेगी| आमतौर पर भारतीय निर्माता 1-5 वर्ष तक की वारंटी देते हैं, और उनके द्वारा प्रस्तुत की गई उत्पादन प्रदर्शन की गारंटी निम्नानुसार होती है:

  • पहले दस सालोँ के लिए मूल्यांकित उत्पादन – 90%
  • अगले दस सालोँ के लिए मूल्यांकित उत्पादन – 80%

स्पष्ट रूप से यह अलग-अलग निर्माण व उत्पाद के लिए भिन्न होता है| कुछ निर्माता रैखिक प्रदर्शन की गारंटी भी देते हैं, जो अधिक बेहतर होती है| यह हमेशा बेहतर होता हैं की आप वारंटी और नियम-शर्तों की जांच स्वयं कर ले, क्यूंकी आप निश्चित रूप से प्रणाली की असफलता और बाद में होने वाले नुकसान को सहन करना नहीं चाहेंगे|

हमेशा आदर्शवादी होने से व्यावहारिक होना ज्यादा बेहतर होता है

यह सत्य है की उपरोक्त कारक केवल डेटाशीट को ठीक से परख लेने भर से ही ज्ञात हो सकते हैं| हालांकि, इनके अलावा भी कुछ कारक हैं, जिनका परीक्षण आप सौर पीवी पैनल की खरीदारी करते समय कर सकते हैं| यह हैं, वीओसी – ओपन सर्किट वोल्टेज और आईइससी- शार्ट सर्किट करंट (इन अवधारणाओं के बारे में अधिक पढ़ने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें: सौर शब्दावली फोटोवोल्टिक पैनलों, मॉड्यूल, सेल, वोल्टेज, वाट और करंट )| निर्माता/आपूर्तिकर्ता संभवतः अपने उत्पादों को बेचने के लिए करंट और वोल्टेज की अतिरंजित मात्रा लिख सकते हैं| यह हमेशा एक अच्छा विचार है की आप हमेशा व्यावहारिक रूप से यह जाँच-परख कर लें की पैनल में दिया सूचीबद्ध मूल्य/मात्रा, वास्तविक आउटपुट से मेल खा रही हैं या नहीं| इससे यह सुनिश्चित हो जाता हैं की आपने एक उचित पैनल ख़रीदा है| आप यह भी सुनिश्चित करें की आपके पास एक अच्छा मल्टीमीटर हो|

यह जानने के लिए की एक सौर पीवी पैनल का परीक्षण कैसे करे: कृपया इस वीडियो को देखें:

कृपया ध्यान दें, कि यदि आप कुछ सुरक्षा एहतियात के तहत ऐसा करेंगे या इसे कुछ योग्य व्यक्ति द्वारा करवाएंगे तो बेहतर रहेंगा| यह भी ध्यान दें, कि तारों को जोड़ते या हटाते हुए सौर पैनल छायांकित होना चाहिए (जैसा की वीडियो में भी दिखाया गया है)

इस लेख से हम केवल सौर पीवी पैनल की गुणवत्ता की तुलना ही कर रहे है| कृपया ध्यान दें, कि आप किस आकर का सौर पीवी पैनल को चुनते है और उसे आप कैसे स्थापित करते है, यह प्रणाली के उत्पादन को अन्तः काफी प्रभावित करता है| हम निश्चित रूप से भविष्य में, डिजाइन और स्थापना पर एक लेख के माध्यम से गहराई में, इन कारकों पर अधिक चर्चा करेंगे।

हम आशा करते हैं की यह लेख आप को कुछ बुनियादी अवधारणाओं के आधार पर सौर पैनल की सही एवं सटीक पहचान व तुलना करने में जरूर मदद करेगा|

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