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सोलर ऊर्जा पर चलने वाला एयर कंडीशनर: सूर्य की प्रचुर ऊर्जा का समुचित उपयोग

By on August 27, 2015 with 18 Comments  

क्या सोलर ऊर्जा एयर कंडीशनर को चलाने के लिए पर्याप्त है? यदि ऐसा संभव है, तो यह कितना अद्भुत लगेगा की हम एक ऐसे वातानुकूलित जगह में रह रहे हो, जहाँ हमे बिजली के बिल के  बारे में बिल्कुल भी परेशानी न हो! और सबसे अच्छी बात तो यह हैं कि, ना केवल सोलर ऊर्जा बहुत आसानी से बल्कि वह बहुतायत में भी उपलब्ध है| हालांकि प्रश्न यह उठता हैं कि क्या एसी को चलाने के लिए सोलर ऊर्जा पर्याप्त हैं, या चलने के लिए उसको बिजली की भी आवश्यकता पड़ती है? यह प्रौद्योगिकी पर निर्भर करता है और इसका प्रभाव एयर कंडीशनर की लागत पर भी पड़ता हैं| हमे बिजली बचाओ पर अनेको पाठकों के कई सवाल मिलते हैं की क्या वह सोलर पीवी प्रणाली का उपयोग कर, अपना एयर कंडीशनर चला सकते हैं अथवा नहीं| इस लेख के माध्यम से हम अपने पाठकों को यह समझाने की कोशिश करेंगे की सोलर पीवी प्रणाली का इस्तेमाल कर एयर कंडीशनर चला सकने में क्या कुछ संभव है और क्या संभव नहीं है|

एक एयर कंडीशनर कैसे काम करता है?

एक एयर कंडीशनर के ३ घटक होते हैं – कंप्रेसर, कंडेनसर और एवेपोरेटर|  एक एयर कंडीशनर का ठंडा करने के लिए रेफ्रिजराँत सबसे महत्वपूर्ण तत्व होता हैं| रेफ्रिजराँत, कंप्रेसर में एक ठंडा कम दबाव गैस के रूप में आता हैं और बिजली का उपयोग कर वह उच्च ऊर्जा गर्म गैस में बदल जाता हैं| इसके बाद रेफ्रिजराँत कंडेनसर में जा कर अपनी संपूर्ण गर्मी को निकाल कर एक बहुत ठंडे तरल पदार्थ में वापस बदल जाता हैं| कंडेनसर में, यह बदलाव उच्च दबाव के तहत होता हैं| इसके बाद वह एवेपोरेटर में जाता हैं, वहां वह कमरे की हवा को बाष्पीकरण (एवेपोरेशन) के माध्यम से ठंडा कर बाहर फेंकता हैं| इस पूरी प्रक्रिया में, कंप्रेसर रेफ्रिजराँत को गर्म और कंप्रेस करने के लिए, सबसे अधिक मात्रा में बिजली की खपत करता हैं|

क्या फोटोवोल्टेइक प्रणाली का एयर कंडीशनिंग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है?

हालांकि तकनीकी रूप से हम वातानुकूलन के लिए पीवी सिस्टम का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन यह एक पसंदीदा विकल्प नहीं होता हैं| पिछले एक लेख में (लिंक) में हमने सोलर पीवी सिस्टम और सोलर थर्मल सिस्टम के बीच के अंतर पर चर्चा की थी कि, कैसे सोलर थर्मल सिस्टम  सोलर पीवी प्रणाली की तुलना में अधिक कुशल और प्रभावी लागत के होते हैं| सोलर थर्मल सिस्टम एयर कंडीशनिंग के लिए सोलर पीवी प्रक्रिया की तुलना में बेहतर विकल्प के तौर पर पसंद किये जातें हैं| जबकि सोलर पीवी प्रक्रिया में हमे एक इन्वर्टर (या इन्वर्टर-बैटरी) प्रणाली स्थापित करने की जरूरत पड़ती हैं| इसके अलावा बाजार में उपलब्ध बहुत कम इन्वर्टर हैं, जो एयर कंडीशनर का भार ले सकते हैं| इस प्रकार सोलर पीवी प्रणाली, एक एयर कंडीशनर चलाने की बहुत कम संभावना प्रदान करते हैं| एक अन्य प्रौद्योगिकी से भी एयर कंडीशनर को वैकल्पिक रूप से चलाया जा सकता हैं, जिसका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस्तेमाल किया जाता है, वह हैं डीसी प्रौद्योगिकी पर कम्प्रेसर का उपयोग|

सोलर थर्मल हाइब्रिड सिस्टम से क्या लाभ हैं?

कंप्रेसर, एयर कंडीशनर का सबसे अधिक मात्रा में बिजली खपत करने वाला इकाई है| वह ठंडा एवं कम दबाव द्रव को कंप्रेस करके फिर गर्म करता हैं|  एक सोलर कलेक्टर पैनल (एक सोलर वॉटर हीटर की तरह), कंप्रेसर के बोझ को कम कर सकता हैं, जो फिर बिजली की खपत को भी कम करते हैं| सोलर कलेक्टर पैनल पीवी इकाइयों की तुलना में काफी सस्ते होते और सोलर ऊर्जा को आवश्यक ऊर्जा में परिवर्तित करने में अधिक सक्षम भी होते हैं|

लेकिन एक सोलर थर्मल हाइब्रिड प्रणाली के साथ एक प्रतिवाद यह जुड़ा होता हैं कि इनको काम करने के लिए बिजली की आवश्यकता होती है और इसके बिना यह उपकरण निष्फल हो जाता है| इन को सोलर थर्मल हाइब्रिड सिस्टम इस लिए कहा जाता है, क्योंकि वे बिजली और सोलर ऊर्जा दोनों का उपयोग पर आधारित होते हैं| रात्रि के वक़्त हालांकि, इनकी दक्षता संदिग्ध होती हैं, क्यूंकि सोलर ऊर्जा तब उपलब्ध नहीं होती हैं, लेकिन फिर भी एक हाइब्रिड सिस्टम होने के कारण, यह निश्चित रूप से उस वक़्त बिजली पर चल सकती हैं|

वेपर अब्सॉर्प्शनआधारित सोलर एयर कंडीशनर से क्या लाभ हैं?

“वेपर अब्सॉर्प्शन” आधारित सोलर एयर कंडीशनर, सबसे कम बिजली खपत करने वाले सोलर एयर कंडीशनर होते हैं| वे सीएफसी का रेफ्रिजराँत के तौर पर इस्तेमाल नहीं करते हैं, अपितु वह पानी/जल पर आधारित होते हैं| सीएफसी मुक्त होने के नाते वे पर्यावरण के लिए भी हानिकारक नहीं होते हैं| “वेपर अब्सॉर्प्शन” आधारित सोलर एयर कंडीशनर में कंप्रेसर भी नहीं होते हैं, इस  प्रकार उनमे सबसे अधिक बिजली लेने वाली इकाई भी नहीं होती हैं| इसके बजाय, इनमे पानी और शोषक (अब्सॉर्बेंट) का उपयोग करने वाले एवापोरेटर का समूह, इबसोरबेर, हीट एक्सचेंजर, कंनडेंसर होते हैं| वह वातानुकूलन करने के लिए इन शोषक (अब्सॉर्बेंट) का उपयोग करते हैं – Li Br or NH3| वह बिजली केवल पंखे, चिल्लेर्स और गर्म पानी पंप के लिए ही उपयोग करते हैं, इसप्रकार वह परंपरागत एयर कंडीशनर की तुलना में बहुत कम बिजली इस्तेमाल करते है| इस पद्धति में कंप्रेसर के रूप में कोई इकाई भी नहीं होती हैं, इसलिए यह अनावश्यक रूप से कोई ध्वनि भी उत्पन्न नहीं करते हैं| हालांकि “वेपर अब्सॉर्प्शन” आधारित सोलर एयर कंडीशनर दिन के समय तो कई घंटो के लिए इस्तेमाल हो सकते हैं, परन्तु, रात में उनका उपयोग सीमित है|  हालांकि रात्रि के वक़्त, हम एक बैकअप स्रोत के रूप में, एलपीजी भी इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन यह बिजली की तुलना में थोड़े महंगे अवश्य पड़ते हैं|

सोलर वातानुकूलन का उपयोग करने से लाभ

जो एयर कंडीशनर हम अपने चारों तरफ देखते हैं, वह बिजली पर ही आधारित होते है| सोलर एयर कंडीशनर वातानुकूलन करने के लिए सूर्य से आवश्यक ऊर्जा ग्रहण करते हैं| इसलिए, सोलर एयर कंडीशनर का उपयोग करके आप अपनी बिजली की जरूरत को या तो पूरी तरह से या फिर काफी हद तक सीमित कर सकते हैं| एक पारम्परिक घर में, एक एयर कंडीशनर आवश्यक बिजली का लगभग 30-40% ही उपयोग करता हैं| व्यावसायिक परिसरों में यह प्रतिशत और भी अधिक होता है|

सोलर एयर कंडीशनर का उपयोग करके आप अपने बिज़ली के बचत में अधिकतम बचत कर सकते हैं| सोलर ऊर्जा आधारित एयर कंडीशनर काफी पर्यावरणीय लाभ भी प्रदान करते हैं|  एयर कंडीशनर पीक डिमांड में प्रमुख योगदान करते हैं| सोलर एयर कंडीशनर पीक लोड स्थानांतरण के अलावा कुल ऊर्जा आवश्यकता को भी काफी हद तक कम कर सकते हैं, जिससे ग्रिड पर तनाव कम करने में भी काफी मदद मिलती हैं|

क्या सोलर एयर कंडीशनर पर सब्सिडी उपलब्ध हैं?

जी हां, सोलर एयर कंडीशनर पर सब्सिडी उपलब्ध हैं| एमएनआरई सोलर एयर कंडीशनर को सब्सिडी उपलब्ध कराती हैं, हालांकि भारतीय बाजार में सोलर एयर कंडीशनर की उपलब्धता सीमित है| बिजली बचाओ द्वारा किए गए अनुसंधान के अनुसार, भारतीय बाजार में केवल मुट्ठी निर्माताओं या खुदरा विक्रेताओं द्वारा ही सोलर एयर कंडीशनर का निर्माण एवं बिक्री होती हैं| कुछ भारतीय उपभोक्ताओ ने जरूर विगत वर्षो में आयातित सोलर एयर कंडीशनर का अपने घरो में प्रयोग किया हैं|

एक उपभोक्ता के नज़रिये से, सोलर एयर कंडीशनर के खरीद में सबसे महत्वपूर्ण विचार यह है कि, क्या उनको चलने के लिए बिजली की आवश्यकता होती है और क्या वह पर्याप्त ठंडक भी प्रदान कर सकते हैं| कुछ शहरों में, जहां विद्युत आपूर्ति विश्वसनीय है, वहां सोलर ऊर्जा आधारित एयर कंडीशनर का उपयोग कर, लोग अपनी बिजली की आवश्यकताओ को कम कर सकते हैं और इस प्रकार वे अपने बिजली के बिल को भी कम कर सकते हैं| वहीँ ऐसे क्षेत्रों में, जहां विद्युत आपूर्ति अविश्वसनीय हैं, वहां केवल सोलर ऊर्जा आधारित एयर कंडीशनर का उपयोग ही सबसे अच्छा विकल्प प्रदान करते है|

About the Author:
Abhishek Jain is an Alumnus of IIT Bombay with almost 10 years of experience in corporate before starting Bijli Bachao in 2012. His passion for solving problems moved him towards Energy Sector and he is keen to learn about customer behavior towards Energy and find ways to influence the same towards Sustainability. .

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