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सोलर बिजली, सोलर तापीय, विद्युत उत्पादन, इनवर्टर, ग्रिड, ऑफ ग्रिड : भ्रान्तियो का समाशोधन

By on April 22, 2016 with 15 Comments  

अगर आप एक बहुत बड़े तकनीक प्रेमी व्यक्ति या एक्सपर्ट नहीं है तो आप के लिए नित्य हो रहे तकनीकी प्रगति को समझना एक कठिन कार्य हो सकता हैं| और अगर यह बिजली या नवीकरणीय (रिन्यूएबल) ऊर्जा की बात हो तब तो तकनीक की वास्तविक समझ रखना और भी मुश्किल हो जाता हैं|

आजकल जैसे अधिक लोगों की सोलर अनुप्रयोगों के प्रति रुचि बढ़ रही हैं, उसी के साथ लोगों में नवीकरणीय ऊर्जा की अवधारणाओं को समझने की रुचि भी बढ़ रही हैं| लोग विशेष रूप से यह समझना चाहते हैं कि वे बिजली कटौती और बढ़ती बिजली की लागत की समस्या से कैसे इन प्रौद्योगिकियों का उपयोग कर लाभ पा सकते हैं|  सोलर विज्ञान कोई अजूबा विज्ञान नहीं है और उसके मूल बातो को समझना निश्चित रूप से कोई बहुत मुश्किल कार्य भी नहीं है| इस लेख के साथ हम अपने पाठकों को सोलर विज्ञान की मूल बातें बता रहे हैं, कुछ ब्योरा स्पष्ट करने की और कुछ भ्रान्तियो को दूर करने की कोशिश भी कर रहे हैं|

सोलर ताप बनाम सोलर इलेक्ट्रिक

सोलर ऊर्जा का बहुगामी उपयोग हो सकता हैं और यह जरूरी नहीं कि हर मामले में उसे बिजली में ही परिवर्तित किया जाए| एक सोलर कुकर, भोजन पकाने के लिए सूरज की गर्मी का उपयोग करता है, और एक सोलर वॉटर हीटर पानी गर्म करने के लिए सूर्य से गर्मी का उपयोग करता है| उसी प्रकार सोलर थर्मल अनुप्रयोग भी होते हैं, जहाँ सूरज की गर्मी को एकत्रित या स्थानांतरित कर उपयोग किया जाता हैं| हालांकि इस प्रकार कोई बिजली उत्पन्न नहीं होती हैं|

एक और उदाहरण है, अभिनव दिन के प्रकाश समाधान, जिसका जिक्र हमने अपने पुराने लेख में भी किया था (लिंक)| इस कार्यविधि से सोलर ऊर्जा बिजली में परिवर्तित तो नहीं होती, बल्कि सूरज की ऊर्जा को रिफ्लेक्टिव सतहों के माध्यम से स्थानांतरित करती हैं|

ऊपर जिक्र किये गए किसी भी कार्यविधि में फोटोवोल्टिक कोशिकाओं (संक्षेप में पीवी) का उपयोग नहीं हो रहा हैं| हालांकि ऊपर जिक्र किये सभी कार्यविधि अत्यधिक कुशल व्यवस्था हैं और फोटोवोल्टिक व्यवस्था की तुलना में सस्ते भी होते हैं| एक पीवी की आवश्यकता तब पड़ती हैं जब हम सोलर ऊर्जा से बिजली उत्पन्न करते है| पीवी सिलिकॉन से बनते हैं और २ प्रकार में उपलब्ध होते हैं| १) मोनो क्रिस्टलीय २) पाली क्रिस्टलीय. अपने नाम के अनुसार वे वोल्ट (या बिजली) में फोटो (या प्रकाश) को परिवर्तित करते हैं| हालांकि उनकी दक्षता, जैसा कि ऊपर भी बताया गया हैं की, सूर्य की ऊर्जा को उपयोग करने में थर्मल या अन्य फोटो व्यवस्थाओ से काफी कम होती हैं|

मोनो क्रिस्टलीय और पाली क्रिस्टलीय के बीच अंतर यह है की मोनो क्रिस्टलीय एकल (सिंगल) सिलिकॉन क्रिस्टल से बनता हैं, जबकि पाली क्रिस्टलीय पीवी, बहु क्रिस्टलीय सिलिकॉन का समूह होता हैं| एक मोनो क्रिस्टलीय पीवी एक प्रति वर्ग मीटर क्षेत्र में सोलर ऊर्जा को परिवर्तित करने में अधिक कुशल होते हैं| वह बहु क्रिस्टलीय पीवी की तुलना में कम जगह लेते हैं, हालांकि वह पाली क्रिस्टलीय पीवी से महंगे जरूर होता हैं|




सोलर ऊर्जा उत्पादन

सोलर ऊर्जा से हम दुनिया के लगभग किसी भी हिस्से में बिजली उत्पन्न कर सकते हैं| सबसे महत्वपूर्ण बात है कि हर जगह सूर्य के प्रकाश की उपलब्धता होनी चाहिए| सूरज से बिजली उत्पन्न करने के लिए हमे सोलर फोटोवोल्टिक (पीवी) प्रणाली की जरूरत है| एक सोलर पीवी प्रणाली एक लंबे समय तक चलने वाली प्रणाली है और 20-30 सालो तक इसका उपयोग हो सकता हैं| सोलर पीवी प्रणाली समूह २ प्रकार के होते हैं:

१) ऑफ-ग्रिड समाधान: एक ऑफ-ग्रिड समाधान स्वतंत्र रूप से काम करता है और ग्रिड से जुड़ा हुआ भी नहीं होता हैं| ग्रिड से हम यह समझते हैं कि, तारों का वह नेटवर्क समूह जो बिजली वितरण कंपनी द्वारा,  बिजली प्रदान करने के लिए बिछाये जातें हैं| एक ऑफ-ग्रिड समाधान बिजली उत्पन्न करके उसका संचय करता है, और वापस ग्रिड को यह प्रदान नहीं करता है| एक नियमित ऑफ-ग्रिड समाधान सिस्टम कुछ ऐसा दिखता हैं:

(फोटो के स्रोत: http://www.altestore.com/)

एक ऑफ-ग्रिड समाधान में एक पीवी मॉड्यूल के माध्यम से बिजली उत्पन्न होती है, इसमें  बैटरी एक चार्ज नियंत्रक के माध्यम से चार्ज होती हैं| एक चार्ज नियंत्रक न केवल बैटरीओ को ओवर चार्ज होने से बचाती हैं, बल्कि यह सुनिश्चित भी करती है कि बैटरी रात या मेघयुक्त दिन में डिस्चार्ज न हो|  उपलब्ध चार्ज नियंत्रक तीन प्रकार के होते हैं: १) शंट २) PWM (पल्स विड्थ मॉडुलेशन) ३) MPPT (मैक्सिमम पावर पॉइंट ट्रैकिंग)| MPPT सबसे कुशल, परिष्कृत होने के साथ साथ अधिक महंगे भी होते हैं| शंट सरल, सबसे कम महंगा, लेकिन कम कार्यकुशल होते हैं|

सोलर प्रणाली को गहरे चक्र बैटरी की जरूरत होती है जो ऑटोमोबाइल में इस्तेमाल बैटरी पर संचालित नहीं की जा सकती हैं| इसलिए, एक ऑफ-ग्रिड समाधान में एक बैटरी बैंक नामक घटक भी होता है| हालांकि, इसे नियमित रखरखाव की जरूरत होती है| |

बैटरी का जीवन इस बात पर निर्भर करता है की उससे कितनी बार चार्ज किया जा सकता हैं, इसीलिए डीप साइकिल बैटरीआ जरूरी होती हैं| बाजार में उपलब्ध बैटरी के कई प्रकार होते हैं, जो बैटरीआ रखरखाव मुफ्त होती हैं, वह मेहेंगी भी होती हैं और आम बैटरी से कम चलती हैं (यह सिर्फ 4-5 साल तक चलती हैं)|  अन्य नियमित बैटरीओ को सही संचालन के लिए नियमित रूप से डिस्टिल्ड जल से भरने की आवश्यता पड़ती हैं| हालांकि अगर इनका अच्छी तरह से रखरखाव हो तो यह भी अधिक समय के लिए चल सकती हैं और यह डीप साइकिल बैटरीओ की तुलना में सस्ते भी होते हैं|

इन्वर्टर, वह यंत्र (डिवाइस) हैं जो डायरेक्ट करंट (डीसी) को अल्टेरनाटिंग करंट (ऐसी) में बदलता हैं और घर के विभिन्न उपकरणों को चलाने के लिए उपयोगी भी होता हैं|

आप अपने घर में, सोलर पैनलों के साथ प्रयोग करने के लिए भी उसी इन्वर्टर का प्रयोग कर सकते है| बाजार में उपलब्ध इनवर्टर के २ प्रकार होते हैं: 1) संशोधित साइन वेव और 2 ) शुद्ध साइन वेव इनवर्टर| अधिक जानकारी के लिए कृपया हमारे लेख “घर के बिजली के बिल का उचित प्रबंधन करने के लिए सही इन्वर्टर का चुनाव” देखे| इसलिए, इनवर्टर का सही चुनाव करके हम अपने बिजली के बिल को नियंत्रित कर सकते हैं|

तो अगर आपके पास मौजूदा इन्वर्टर युक्त समाधान है और आप उसमे एक पीवी प्रणाली एकीकृत करना चाहते हैं, तो उसे आप एक पीवी मॉड्यूल सरणी और एक प्रभारी नियंत्रक द्वारा कर सकते हैं और मौजूदा सिस्टम से कनेक्ट भी कर सकते हैं|

२) ग्रिड जुड़ाव समाधान: एक ग्रिड जुड़ाव समाधान, ऑफ ग्रिड समाधान की तुलना में स्थापित करने के लिए सरल और सस्ता समाधान है| इसको कम रखरखाव की आवश्यकता होती है| इसमें बैटरी को शामिल करने की कोई आवश्यता नहीं होती हैं| तो अनिवार्य रूप से एक ग्रिड जुड़ाव समाधान ऊपर रेखांकित चित्र के समान है, जिसमे प्रभारी नियंत्रक और बैटरी बैंक नहीं हैं|

कुछ इस तरह:

पीवी ऐरे के माध्यम से उत्पन्न बिजली, इन्वर्टर और ग्रिड से भी जुडी होती है| दिन के दौरान, जब पर्याप्त सूरज की रोशनी होती हैं, उत्पन्न बिजली घर में इन्वर्टर के माध्यम से इस्तेमाल की जा सकती हैं  और अतिरिक्त उत्पन्न बिजली को ग्रिड में भेजा जाता हैं| वितरण कंपनिया इस उत्पन्न अतिरिक्त बिजली को अन्य क्षेत्रों में वितरित करके इसका सदुपयोग कर सकते हैं| बदले  में बिजली के निर्माता जिसने पीवी प्रणाली स्थापित की है, उसको छूट का लाभ भी मिलता हैं| हालांकि, छूट का लाभ रात के दौरान ग्रिड द्वारा उत्पन्न बिजली के प्रयोग में ही मिलता हैं| इस तरह से यह प्रणाली सस्ती पड़ती हैं, क्यूंकि यह भंडारण के लिए किसी भी प्रकार की बैटरी का उपयोग नहीं करता हैं| इसको कम रखरखाव की भी आवश्यकता पड़ती हैं| क्यूंकि इस प्रणाली में भंडारण की आवश्यकता नहीं होती, इसलिए यह उन स्थानों के लिए अच्छी नहीं मानी जाती जहाँ रात के दौरान अधिक बिजली कटौती होती हो|

एक पीवी सिस्टम की आकार व्यवस्था

अगर हम एक ग्रिड कनेक्टेड समाधान स्थापित कर रहे हैं, तब तो एक पीवी सिस्टम की आकार व्यवस्था बहुत महत्वपूर्ण नहीं है| इसकी वजह है की अगर आपके बिजली उपयोग अधिक है तो आवश्यक अतिरिक्त बिजली, ग्रिड से आ सकती हैं| किन्तु अगर आपका बिजली उपयोग कम है, और आपके प्रणाली ने आवश्यकता से अधिक बिजली उत्पन्न की हैं, तब अतिरिक्त बिजली ग्रिड को जाएगी जिसके बदले में आपको छूट का लाभ मिलेगा| परन्तु पीवी सिस्टम की आकार व्यवस्था एक ऑफ ग्रिड प्रणाली के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो सकती हैं, पीवी मॉड्यूल की संख्या, बैटरी ऐरे और इन्वर्टर के आकार आपके सेटअप की स्थापना पर निर्भर करते हैं| लगभग हर जगह के मानकों के अनुसार, ऐसा माना जाता है कि एक दिन में एक सोलर पीवी प्रणाली केवल 5-7 घंटे के लिए बिजली उत्पन्न कर सकते हैं|  इसका मतलब है कि 1 किलोवाट सोलर पीवी प्रणाली से 5-7 यूनिट बिजली उत्पन्न हो सकती हैं|

पीवी प्रणाली के सही आकर का निर्धारण करने के लिए सबसे अच्छा साधन है आप का बिजली का बिल| आप अपने मासिक बिजली बिल ले और उसमे से अपनी बिजली इकाइयों को 30 से विभाजित करदे (महीने के आधार पर 28 या 31 से) इससे आपको दैनिक इकाइयों के उपयोग मिल जायेगा|

अन्यथा आप अपने उपकरणों की वाट क्षमता का ज्ञात करें, और नीचे दिए गए फार्मूले का उपयोग कर दैनिक इकाइयों की गणना करें:

यूनिट = उपकरणों की वाट क्षमता x एक दिन में कुल घंटे का प्रयोग/1000

सभी उपकरणों की इकाइयों का कुल योग करके आपको दैनिक इकाइयों का कुल गणना मिल जाएगी|

एक पीवी सिस्टम की आकार व्यवस्था सुनिश्चित करके आपको महीने की बिजली खपत का एक अंदाजा सटीक लग जाएगा| कृपया ध्यान दें, बिजली की खपत हर महीने परिवर्तित होती हैं (लिंक), इसलिए अधिकतम बिजली की खपत के अनुसार आप अपने पीवी सिस्टम के आकार को सुनिश्चित करें|

सन्दर्भ

http://www.altestore.com/store/webinar/Educational-Video-Solar-Electricity-Basics-w6053/

About the Author:
Abhishek Jain is an Alumnus of IIT Bombay with almost 10 years of experience in corporate before starting Bijli Bachao in 2012. His passion for solving problems moved him towards Energy Sector and he is keen to learn about customer behavior towards Energy and find ways to influence the same towards Sustainability. .

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