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भारत में घरेलु सौर पैनलों की कीमत, निर्माता और प्रौद्योगिकी वर्ष 2020

By on January 28, 2020 with 303 Comments  
Atomberg

घरों में बिजली पैदा करने के लिए सौर पैनलों की उपलब्धता भारत में काफी समय से है। फिर भी, लंबे समय तक, अधिकांश भारतीयों के लिए यह आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं था। लेकिन भारत में सरकार द्वारा महत्वपूर्ण नीति-स्तरीय कार्यान्वयन के साथ पिछले कुछ वर्षों में भारत में सौर पैनल की कीमतों में गिरावट के कारण, अब, in 2020 में, घर के लिए सौर पैनल काफी आकर्षक लग रहे हैं। भारत में सोलर पैनल निर्माताओं ने भी अपने आप को तकनिकी जानकारी प्राप्त कर इस दिशा में अपनी पहचान बनाकर अपने स्थान को काफी मजबूत किया है, और बाजार अब काफी संगठित और लागत प्रतिस्प्रधा के साथ उपलब्ध है।

कौन होगा जो जो सौर ऊर्जा का उपयोग नहीं करना चाहेगा, मुफ्त में उपलब्ध सौर ऊर्जा को बिजली में बदल कर आप अपने बिजली बिलों को लम्बे समय के लिए प्रभावी ढंग से काम करने के साथ साथ कार्बन फुटप्रिंट को काम करने के लिए अपना योगदान कर सकते हैं। इस पोस्ट के साथ, हम आपको प्रौद्योगिकी, निर्माताओं, कीमतों और अन्य प्रासंगिक चीजों को समझने में मदद करने की कोशिश करेंगे जिन्हें आपको इस प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ने के लिए ध्यान में रखना चाहिए।सबसे पहले, अगर आप भारत में बेस्ट सोलर पैनल मैन्युफैक्चरर्स और उनकी कीमतों की जानकारी चाहते है तो उनके जानकार इस प्रकार से है:

भारत में विभिन्न निर्माताओं के सौर पैनल की कीमतें

Manufacturer Min Price Max Price
Vikram Solar Rs 19/Watt Rs 30/Watt
Waaree Solar Rs 19/Watt Rs 28/Watt
Luminous Rs 24/Watt Rs 58/Watt
Tata Power Solar Rs 20/Watt Rs 62/Watt
Adani Solar Rs 18/Watt Rs 35/Watt
Microtek Solar Rs 25/Watt Rs 60/Watt

कुछ अन्य अच्छे ब्रांड हैं एम्मेवी सोलर, नेविटास सोलर आदि है।

अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों की कीमतें भी बहुत अलग नहीं हैं और यहां कुछ ऐसे हैं मैन्युफैक्चर को लिस्ट किया गया है:

Manufacturer Min Price Max Price
Panasonic Rs 24/Watt Rs 52/Watt
Canadian Solar Rs 25/Watt Rs 46/Watt

इन उत्पादक में मोनोक्लेरैलिन और पॉलीक्रिस्टलाइन दोनों प्रकार के पैनल शामिल हैं। इन प्रकारों को नीचे समझाया गया है। इसके अलावा, यह केवल पैनलों की कीमत है और इसमें घर के लिए सोलर पैनल सिस्टम स्थापित करने में शामिल अन्य चीजें शामिल नहीं हैं। यदि आप अपने घर के लिए एक स्थापित करना चाहते हैं, तो इस पोस्ट को अंत तक पढ़ते रहें।

भारत में सोलर पैनल सिस्टम की कीमतें

सोलर सिस्टम की कीमत आपके ख़रीदे जाने सौर पैनल प्रणाली के प्रकार पर निर्भर करेगी। हमने नीचे लिखे कुछ खंडों में विभिन्न प्रकार के सोलर पैनल सिस्टम की व्याख्या की है।

यदि आप एक ऑफ-ग्रिड सौर पैनल प्रणाली अपने घर मे लगाना चाहते हैं , जिसमें पैनल, इन्वर्टर, चार्ज कंट्रोलर, बैटरी, वायरिंग, संरचना, कनेक्टर, जंक्शन बॉक्स आदि शामिल हैं, तो यह प्रति किलोवाट 70,000 रुपये से 1,20,000 रुपये के बीच कहीं भी होगाज इस बात पर निर्भर करेगा की आप किन पैनलों और इन्वर्टर को शॉर्टलिस्ट करते हैं। सोलर सिस्टम की capacity (kW में) जांच करने के लिए, जिसे आपको स्थापित करने की आवश्यकता है, नीचे दिए गए कैलकुलेटर का उपयोग करें।

यदि आप ग्रिड-कनेक्टेड सोलर पैनल सिस्टम के लिए जाते हैं, जिसमें पैनल, इनवर्टर, वायरिंग, स्ट्रक्चर, कनेक्टर, जंक्शन बॉक्स आदि शामिल हैं, तो इसकी कीमत 45,000 रुपये से 80,000 रुपये प्रति किलोवॉट के बीच होगी। आपको जिस आकार की आवश्यकता है, उसकी जांच करने के लिए, नीचे दिए गए पृष्ठ पर अधिक जानकारी के लिए पढ़ें।

आपके लिए जरूरी है कि सही प्रकार की प्रणाली को खोजने के लिए, सौर पैनल सिस्टम के प्रकारों पर नीचे दिए गए अनुभाग की जांच करें।

सोलर थर्मल बनाम सोलर इलेक्ट्रिक में क्या अंतर है?

इस मंच पर, हमें बहुत लोग यह प्रश्न पूछते हैं कि क्या वे अपने सौर वॉटर हीटर का उपयोग करके बिजली उत्पन्न कर सकते हैं। यह समझना आवश्यक है कि सोलर वाटर हीटर सोलर (सोलर थर्मल) एक अलग तकनीक का उपयोग करते हैं जबकि सोलर इलेक्ट्रिक पैनल बिजली उत्पादन का काम करता है।

एक सौर वॉटर हीटर सूर्य के प्रकाश की गर्मी का उपयोग करता है और उससे पानी को गर्म करता है जो थर्मल इंसुलेटेड पाइप के द्वारा आपके घर को गर्म पानी प्राप्त करता है। इसके विपरीत, एक सौर इलेक्ट्रिक पैनल में फोटो वोल्टिक सेल होते हैं जो सूर्य के प्रकाश का उपयोग करके इसे बिजली में परिवर्तित करता है। सौर जल हीटर में तांबे या कांच के पाइप होते हैं जो ऊष्मा को सोखने और सोखे रखने के लिए ऊष्मा शोषक सामग्री के साथ लेपित होते हैं। जबकि, सौर पैनलों मे सिलिकॉन क्रिस्टल का उपयोग करके सूरज की रोशनी को बिजली में परिवर्तित किया।

आपके घर के लिए एक आदर्श सोलर सिस्टम

सौर पैनलों प्रणाली के दो प्रकार हैं:

ऑफ-ग्रिड सोलर पैनल सिस्टम:

जब आपके घर में नियमित बिजली कटौती होती है और आप पावर बैकअप समाधान की तलाश कर रहे हैं तो इस प्रकार की प्रणाली आदर्श है । इस प्रणाली में एक सौर पैनल, एमपीपीटी प्रभारी नियंत्रक, इन्वर्टर और एक बैटरी बैंक शामिल हैं। सौर पैनल की भूमिका प्रकाश को ऊर्जा (या बिजली) में परिवर्तित करना है। प्रभारी नियंत्रक यह सुनिश्चित करता है कि विद्युत प्रवाह की सही मात्रा उत्पन्न होती है और बैटरी को पारित किया जाता है। इससे बैटरी का ओवर चार्जिंग से बचाव होता है । बैटरियां स्टोरेज टैंक हैं जो उत्पन्न होने वाली सभी ऊर्जा या बिजली को स्टोर करती हैं। इन्वर्टर एक कार इंजन की तरह होता है, जो बैटरी में संग्रहीत बिजली को ले जाकर उपकरणों की आवश्यकता के अनुसार वोल्टेज को परिवर्तित कर को चलाने में मदद करता है।

जैसे की ज्ञात रहे की यह सिस्टम बैटरी के साथ आता है, इसका उपयोग उस समय भी किया जा सकता है जब बिजली की आपूर्ति न हो। आप सौर हाइब्रिड इनवर्टर भी प्राप्त कर सकते हैं जो सूरज की रोशनी होने पर बैटरी को चार्ज कर सकते हैं और सूरज की रोशनी पर्याप्त नहीं होने पर ग्रिड से चार्ज कर सकते हैं।

चूंकि इस प्रणाली में बैटरी और भंडारण शामिल हैं, इसलिए यह प्रणाली महंगी है और बैटरी के नियमित रखरखाव की भी आवश्यकता है। बैटरी को हर 4-6 साल में बदलने की भी आवश्यकता होती है जो इस बात पर निर्भर करता है कि वे कितनी अच्छी तरह से मेन्टेन की गई है

सोलर सिस्टम की कैपेसिटी कैलकुलेट करने के लिए नीचे दिए गए आकार सेक्शन को पढ़ें।

ग्रिड कनेक्टेड सोलर पैनल सिस्टम:

यदि सौर को लागू करने का आपका उद्देश्य आपके बिजली के बिल को कम करना है, तो ग्रिड से जुड़ा सिस्टम एक आदर्श प्रणाली है। ग्रिड से जुड़े सिस्टम में, बैटरी नहीं होती हैं। प्रायः सोलर सिस्टम से बिजली का उत्पादन आपके घर में उपयोग की जाने वाली बिजली के उपकरणों के लिए उपयोग किया जाता है। यदि अतिरिक्त उत्पादन होता है, तो यह आपकी बिजली वितरण कंपनी को बेच दिया जाता है। यदि आपकी बिजली की खपत सौर पैनलों के उत्पादन से अधिक है, तो इस कमी की भरपाई ग्रिड द्वारा की जाती है। इस प्रणाली में एक इन्वर्टर और एक नेट-मीटर होता है ।

यदि आपके पास नियमित बिजली कटौती है, तो यह प्रणाली अच्छी नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ग्रिड फेल होते ही इन्वर्टर काम करना बंद कर देता । ऐसी अवस्था में यदि सोलर सिस्टम बिजली पैदा करने की क्षमता रखता है लकिन ग्रिड फेल है, तो इससे पैदा होने वाली बिजली आप इस्तेमाल नहीं कर सकते है और बिजली बर्बाद हो जाती है।

आपके लिए सिस्टम के सही कैपेसिटी की गणना करने के लिए नीचे दिए गए कैपेसिटी अनुभाग पर जाँच करें।

सोलर पैनल सिस्टम के साइज को निर्धारित करना

सौर पैनल प्रणाली का आकार उस प्रणाली के प्रकार पर निर्भर करता है, जिसके लिए आप जा रहे हैं। आइए हम दो प्रकारों को सिस्टम को समझने का प्रयास करें:

  1. ऑफ ग्रिड सोलर सिस्टम

अपनी ऑफ-ग्रिड जरूरतों के लिए सौर पैनल प्रणाली का सही आकार प्राप्त करने के लिए, आपको उन उपकरणों की सूची बनानी होगी जिन्हे आप सोलर से चलाना चाहते है और अधिकतम कितने घंटे चलाने की आवश्यकता है । ऐसा इसलिए है क्योंकि आपको बैटरी के आकार और प्रकार को समझने की आवश्यकता है जो उस बिजली को दिन के समय संग्रहीत करने के काम करेगा। इसके साथ आपको किस रेटिंग के पैनल लगाना है का भी निर्णय लेना होगा जो पर्याप्त बिजली उत्पन्न कर सकते हैं। हमने एक कैलकुलेटर तैयार किया है जिसका उपयोग आप अपने सौर-इन्वर्टर-बैटरी आवश्यकताओं की गणना करने के लिए कर सकते हैं। यह कैलकुलेटर से आप सोलर सिस्टम की कैपेसिटी कैलकुलेट कर सकते हैं।

  • कैलकुलेटर में आप उन सभी उपकरण ‘add’ करें जो सोलर सिस्टम से चलाना चाहते हैं । आप हमेशा ‘वाट’ क्षमता को बदल सकते हैं यदि आप जानते हैं कि यह कैलकुलेटर में उल्लिखित क्षमता से अलग है। आप अधिक उपकरण जोड़ने के लिए नीचे स्थित “उपकरण add करें” बटन का उपयोग कर सकते हैं। किसी उपकरण को निकालने के लिए, प्रत्येक पंक्ति के अंत में “X” दबाएं।
  • कैलकुलेटर में उपकरणों की सूची सबसे सामान्य उपकरणों में से कुछ पर आधारित है, जिन पर हमें प्रायः प्रश्न मिलते हैं। यदि आपको सूची में अपना उपकरण नहीं मिलता है, तो आप अंत में “कस्टम” का चयन कर सकते हैं
  • गणना प्राप्त करने के लिए नीचे की ओर “गणना करें” बटन दबाएं। यदि आप सौर पैनलों की आवश्यकता के लिए गणना करना चाहते हैं, तो “गणना सौर पैनल आवश्यकता (Calculate Solar Panel Requirement” चेकबॉक्स पर टिक करें।
    आप चाहें तो आउटपुट प्रिंट भी कर सकते हैं।
  • कृपया ध्यान दें कि यह कैलकुलेटर नियमित होम सेटअप या छोटी आवश्यकता के लिए अच्छा है। यह बड़े वाणिज्यिक या औद्योगिक सेटअप के लिए अच्छी तरह से काम नहीं करेगा।

Inverter Battery Calculator
Appliance
Count
Watts
Total Watts
Usage Hours
Total Wh

ऑन-ग्रिड सिस्टम के आकार (kWp) को कैलकुलेट करने के लिए, आपको अपने बिजली के बिलों को देखना होगा। दो पैरामीटर हैं जो महत्वपूर्ण हैं: एक आपकी अधिकतम मासिक खपत पूरे वर्ष में और दूसरा आपका जुड़ा हुआ या स्वीकृत भार (kW मे ) है। 1 kWp सोलर पैनल सिस्टम प्रति दिन लगभग चार यूनिट बिजली पैदा कर सकता है। यह कम या ज्यादा हो सकता है जो सूर्य के प्रकाश पर निर्भर करता है। अपनी अधिकतम मासिक खपत कैलकुलेट करें और इसे 120 (4 x 30 – 4 unit 30 दिनों में) से विभाजित करें। इससे आपको kWp की संख्या प्राप्त होगी जो आपको लगाने है जिससे आपका बिजली का बिल माह के अंत मे शून्य हो जाये। कृपया ध्यान दें कि आपके पैनल का आकार आपके कनेक्टेड लोड के 150% से अधिक नहीं हो सकता है (कुछ राज्यों में 100%)।

Monocrystalline (मोनोक्रिस्टलाइन) vs Polycrystalline (पॉलीक्रिस्टलाइन)

सौर पीवी सेल, मोनोक्रिस्टलाइन और पॉलीक्रिस्टलाइन दो प्रकार के होते हैं। दोनों के बीच अंतर यह है कि मोनोक्रिस्टलाइन एक सिलिकॉन क्रिस्टल से बना है। इसके विपरीत, मल्टी-क्रिस्टलीय पीवी कई क्रिस्टल से बना होता है। एक मोनोक्रिस्टलाइन एक बहु-क्रिस्टलीय पीवी की तुलना में प्रति वर्ग मीटर क्षेत्र में सौर ऊर्जा को परिवर्तित करने में अधिक कुशल है। इस प्रकार वाट की समान मात्रा के लिए आवश्यक roof top space मोनोक्रिस्टलाइन पीवी पैनल में कम है। इसलिए यह पॉलीक्रिस्टलाइन की तुलना में महंगा है ।

यदि आपके पास कम जगह है और आपके पास अधिक बिजली की आवश्यकता है, तो मोनोक्रिस्टलाइन के लिए जाएं। यदि आपके पास पर्याप्त जगह है, तो पॉलीक्रिस्टलाइन पैनल अच्छे होंगे। रूफ टॉप स्पेस की आवश्यकता की जानकारी के लिए, नीचें पढ़ें।

सौर पैनल प्रणाली के लिए स्पेस की आवश्यकता

सौर पैनलों की स्पेस आवश्यकता पैनलों की दक्षता पर निर्भर करती है। उच्च दक्षता पैनलों को कम जगह की आवश्यकता होती है। 1 किलोवाट प्रणाली के लिए लगभग 80-100 वर्ग फुट स्पेस लगेगा । पॉलीक्रिस्टलाइन पैनल में, दक्षता 13-17% के बीच है। मोनोक्रिस्टलाइन पैनल में, यह 17-19% के बीच है।

कृपया ध्यान दें कि आवश्यक स्थान केवल कोई स्थान ही नहीं है, लेकिन यह छाया रहित स्थान होना चाहिए, जहां पैनलों को सही झुकाव पर लगाया जा सके । उचित झुकाव और दिशा हर शहर में भिन्न होती है, और आपको इसकी मदद के लिए सोलर ईपीसी (इंजीनियर, प्रोक्योर एंड कंस्ट्रक्ट) कंपनी को नियुक्त करना चाहिए। आमतौर पर आदर्श दिशा दक्षिण में 15-18 डिग्री के झुकाव के साथ होती है। अपने सौर पैनलों से अधिकतम वाट प्राप्त करने के लिए, आपको स्थापना से पहले क्षेत्र का छाया-विश्लेषण भी करना होगा। आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि:

  • कोई बाहरी निकाय (जैसे भवन, पेड़) नहीं है जो दिन में पैनलों पर छाया डालते हैं।
    पैनलों को इस तरह से रखा गया है कि उन्हें पूरे दिन सही कोण पर अधिकतम धूप मिले।

बाजार में उपलब्ध सॉफ्टवेयर है जो आपको छाया विश्लेषण करने में मदद कर सकता है। बिजली उत्पादन पर छाया का प्रभाव दिखाने वाला एक वीडियो यहाँ है:

कई लोग हमसे पूछते हैं कि क्या सौर पैनलों को लंबवत (vertical) रूप से स्थापित किया जा सकता है। यह हो सकते हैं, लेकिन उसमे दक्षता मे काफी कमी हो जाएगी। यह उन्हें लागत के दृष्टिकोण से अलाभकारी बनाता है। यही कारण है कि गगन चुम्बी इमारत में एक अपार्टमेंट में सौर पैनल स्थापित करना मुश्किल है। गगन चुम्बी इमारत में रहने वाले लोगों को एक सन्युक्त सौर पैनल प्रणाली स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए जो कॉमन एरिया को बिजली की आपूर्ति कर सके ।

सौर पीवी प्रणाली के लिए वारंटी और रखरखाव की आवश्यकताएं

सोलर पैनल्स आमतौर पर 25 साल की वारंटी के साथ आते हैं। लेकिन यह वारंटी केवल पैनलों के लिए है। इन्वर्टर और बैटरी (ऑफ-ग्रिड सिस्टम में) की वारंटी हर निर्माता अपने हिसाब से निर्धारित करतें है।

निर्माताओं को सिस्टम के साथ अंग्रेजी और स्थानीय भाषा में एक संचालन, निर्देश और रखरखाव मैनुअल प्रदान किया जाता है और उसको पूर्णतः पढ़ लेना आवश्यक है । सभी विद्युत और यांत्रिक प्रणाली की तरह, सौर पैनल प्रणाली को भी नियमित रखरखाव की आवश्यकता होती है। एक कुशल, लंबे समय तक चलने वाली प्रणाली वह है जो ठीक से और नियमित रूप से बनाए रखी जाती है। एक सौर पैनल प्रणाली को बहुत अधिक रखरखाव की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन इसकी दक्षता बनाए रखने के लिए नियमित रूप से धूल और पक्षी की बीट को साफ करना आवश्यक है। लम्बे समय के उपरान्त ऐसा हो सकता है की panel मे इस्तमाल किए गए चैनल मे रोस्टिंग या बोल्ट के लूज़ हो जाने के सम्भावना हो सकती है और इसका निरक्षण करके दुरस्त करना आवश्यक है। यदि आप एक रखरखाव-मुक्त बैटरी चुनते हैं, तो आपको बैटरी के बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, अन्यथा बैटरी को नियमित रखरखाव की आवश्यकता होगी जैसा पानी का लेवल देखना और उसे डिस्टिल्ड पानी को समय समय पर भरते रहना होगा।

क्या आपकी छत पैनलों को भार वहन कर सकती है?

आमतौर पर सौर पैनल काफी हल्के होते हैं। फिर भी, एक बार जब आपने सौर पीवी स्थापित करने का स्थान तय कर लिया है, तो आपको यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि छत सौर पीवी प्रणाली को संभालने में सक्षम होना चाहिए। यदि आपके पास एस्बेस्टस या टिन की चादरें हैं, तो आप लोड को पकड़ने और माउंट के उपयुक्त कोण प्रदान करने के लिए ढांचे को मजबूत करना सुनिश्चित करना होगा । आपकी छत पैनलों और स्ट्रक्चर के वजन को पकड़ने के लिए पर्याप्त मजबूत होनी चाहिए। अगर आपकी छत काफी ऊंची है और बहुत हवा चलती है, तो आपको अपने ठेकेदार के साथ इस बात को सुनिश्चित करले के अधिक हवा के चलने से पैनल उखड न जाये।यदि आवश्यक हो, तो आपको यह सुनिश्चित करने के लिए अपने नगर निगम से अनुमति लेनी होगी कि जिससे आप सभी सुरक्षा पैरामीटर पर सही पाए जायँ। इसके लिए आपका ठेकेदार आपकी मदद करने की लिए तैयार होना चाहिए।

पैनल के लिए सही ब्रांड कैसे चुनें?

अब जब आपने अपने सौर पीवी के सही आकार का पता लगा लिया है, तो आपको अपने सौर पीवी प्रणाली के विभिन्न पार्ट्स का चयन करना शुरू करना होगा। जब आप सोलर पीवी सिस्टम इंस्टॉलेशन के लिए किसी कंपनी से संपर्क करते हैं, तो ज्यादातर मामलों में आप उन्हें सिस्टम के घटकों के निर्माता नहीं पाएंगे, वे सिर्फ इंस्टॉलर होंगे जो आपको विभिन्न पार्ट्स का सही चयन करने में मदद करेंगे। लेकिन फिर उन पार्ट्स के लिए उपलब्ध विभिन्न ब्रांडों के बारे में पता होना आपके लिए अति महत्वपूर्ण है जिससे आप उसके साथ अच्छी चर्चा कर सकें।

एक समानता के लिए इस पर विचार करें: जैसे कारों में डीलर और निर्माता होते हैं, जहां एक डीलर के पास एक या कई ब्रांडों की डीलरशिप हो सकती है, सोलर पीवी के लिए एक सिस्टम इंस्टॉलर में विभिन्न ब्रांडों के उपकरणों के साथ टाई-अप होगा और वे बस लाएंगे और जोब्रांड आप चुनते हैं उसके आधार पर सिस्टम को आपके घर पर स्थापित करते हैं ।

चुनने के लिए पहली चीज पैनल है। जैसे कार खरीदते समय आपको यूरोपियन (बीएमडब्ल्यू, ऑडी, वोक्सवैगन), जापानी (होंडा, टोयोटा), भारतीय (टाटा, महिंद्रा) और चीनी उत्पाद मिलते हैं, उसी तरह, सोलर पैनल्स में भी आपको विभिन्न देशों के विभिन्न ब्रांड मिल सकते हैं। सौर पीवी के मामले में, वैश्विक बाजार (global market) के चीन के ब्रांड बहुताय में हैं।

विकिपीडिया पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कैपेसिटी क्षमता के आधार पर, और उद्योग से प्राप्त जानकारी के आधार पर शीर्ष अंतर्राष्ट्रीय ब्रांड इस प्रकार हैं:

  • First Solar (Malaysia)
    Trina (China)
    Canadian Solar (Canada)
    Sharp (Japan)

यदि आप परिचित ब्रांडों (नामों) की तलाश कर रहे हैं, तो आप निम्न पर नज़र डाल सकते हैं:

  • Mitsubishi
  • Panasonic
  • Bosch

हालांकि, यदि आप अपने सौर पीवी इंस्टॉलेशन पर सब्सिडी चाहते हैं, तो आपको उन पैनलों के लिए जाना होगा जो ‘मेड इन इंडिया’ हैं। MNRE (लिंक) से जानकारी के आधार पर, निर्माता / ब्रांड जो सौर पीवी विनिर्माण बाजार का नेतृत्व करते हैं इस प्रकार से है :

  • Vikram Solar
  • Waaree Solar
  • Tata Power Solar
  • Adani Solar

कृपया ध्यान दें कि भारतीय ब्रांडों में, विक्रम सोलर एकमात्र ऐसा है जो विकिपीडिया पर वैश्विक सूची (ग्लोबल लिस्ट) में है, और वायरी सोलर में सामान क्षमताएँ हैं।

इन ब्रांडों में क्या अंतर है?

शीर्ष अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों में कम क्षेत्र में अधिक आउटपुट देने वाले और अधिक कुशल पैनल मिलेंगे । एक शीर्ष अंतरराष्ट्रीय ब्रांड से 90 वर्ग फुट में 1 kWp कैपेसिटी , जबकि एक नियमित भारतीय ब्रांड से आपको 100 वर्ग फुट जगह में 1 kWp मिल सकता है। अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों के साथ कम रखरखाव के कुछ अतिरिक्त फायदे हो सकते हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय ब्रांड के लिए आपको सब्सिडी नहीं मिलती है।

एक पैनल खरीदने से पहले, सुनिश्चित करें कि या तो ब्रांड एक शीर्ष अंतरराष्ट्रीय ब्रांड है, या यह एमएनआरई-अनुमोदित चैनल पार्टनर है। MNRE- अनुमोदित निर्माताओं की सूची प्राप्त करने के लिए, आप इस लिंक पर जा सकते हैं: निर्माता

आपके पैनल निर्माता को आपको सौर पैनलों के आउटपुट पर एक परफॉरमेंस वारंटी देनी चाहिए। आमतौर पर परफॉरमेंस वारंटी पहले 10 वर्षों में नॉमिनल बिजली उत्पादन के 90% और 25 वर्षों के लिए 80% के लिए होती है। इसका मतलब है कि पैनल पहले 10 वर्षों के लिए रेटेड बिजली उत्पादन का कम से कम 90% और 25 वर्षों के लिए कम से कम 80% देंगे। इस बात का ध्यान रखे की कारीगरी पर भी आपको वारंटी मिलनी चाहिए।

ग्रिड-कनेक्टेड इन्वर्टर के लिए सही ब्रांड कैसे चुनें?

पैनलों की तरह, भारत में कई ब्रांड इनवर्टर (विभिन्न क्षेत्रों से) उपलब्ध हैं। हालाँकि, इनवर्टर के मामले में, आपकी सब्सिडी इन्वर्टर के निर्माण पर निर्भर नहीं करती है; आप किसी भी इन्वर्टर को खरीद सकते हैं जो MNRE विनिर्देशों (स्पेसिफिकेशन) को पूरा करता है और एक सब्सिडी के लिए मान्य है।

सोलर इन्वर्टर के शीर्ष अंतरराष्ट्रीय ब्रांड (भारत में उपलब्ध) इस प्रकार से हैं:

  • SMA Solar
  • ABB
  • Schneider
  • Fronius
  • Huawei

इनवर्टर के भारतीय निर्माता भी सौर इनवर्टर के निर्माण में हैं, इसलिए आप भारतीय निर्माताओं से भी इन्वर्टर प्राप्त कर सकते हैं जिसकी सूची निम्न है:

  • Luminous
  • Microtek

इन्वर्टर का चयन करते समय, कृपया सुनिश्चित करें कि इन्वर्टर (डीसी को एसी में बदलने) की दक्षता अधिक है। अंतर्राष्ट्रीय ब्रांडों में ऊर्जा दक्षता 98% है। जिसका अर्थ है, केवल 2% बिजली का नुकसान और लगभग आपके पीवी पैनल की सभी डीसी ऊर्जा को उपयोगी एसी ऊर्जा में परिवर्तित करता है। इन दिनों इनवर्टर में सौर पैनलों से बिजली उत्पादन का प्रबंधन और निगरानी करने के लिए इन-बिल्ट सॉफ़्टवेयर समाधान भी हैं। तो, आप भी सुनिश्चित करें कि यह प्रावधान उस इन्वर्टर मैं है जो आपने सेलेक्ट किया है।यदि आप सब्सिडी के लिए जाते हैं, तो अधिकांश बुनियादी आवश्यकताएं (सॉफ्टवेयर सहित) एमएनआरई द्वारा आवश्यकताओं में शामिल हैं।

आपके कनेक्शन के प्रकार के आधार पर, आपको यह भी सुनिश्चित करना होगा कि यह सिंगल फेज या थ्री फेज इन्वर्टर है।

इलेक्ट्रोलाइटिक कैपेसिटर के उपयोग और एक अच्छा हीट सिंक के साथ ताप के सुदृढ़ मैनेजमेंट स्थापित कर एक अच्छा इन्वर्टर बनाया जा सकता है।आशा करें की आपको एक फिट-एंड-फॉरगेट प्रणाली का इन्वर्टर मिले जिसे आपको वर्षों तक रखरखाव की आवश्यकता नहीं दिखनी चाहिए।

ऑफ-ग्रिड इन्वर्टर के लिए सही ब्रांड कैसे चुनें?

यदि आप एक ऑफ-ग्रिड इन्वर्टर की योजना बना रहे हैं, तो आपको ज्यादातर भारतीय ब्रांड मिलेंगे। जिनमे सबसे लोकप्रिय हैं:

  • Luminous
  • Microtek

आपके पास सोलर इन्वर्टर या सोलर हाइब्रिड इन्वर्टर के विकल्प उमलब्ध है । एक सौर हाइब्रिड इन्वर्टर ग्रिड और सोलर पैनल दोनों से बिजली का उपयोग करके बैटरी चार्ज कर सकता है जबकि सोलर इन्वर्टर केवल सोलर ऊर्जा से बिजली का उत्पादन करने में सक्षम होते हैं।

अन्य सामान कैसे चुनें?

सौर पैनल प्रणाली के लिए आवश्यक अन्य सामान हैं:

AJB (ऐरे जंक्शन बॉक्स) – सुरक्षा के लिए क्योंकि कोई अर्थिंग नहीं है।
एसी और डीसी वितरण बॉक्स – सुरक्षा के लिए क्योंकि कोई अर्थिंग नहीं है।
डीसी केबल्स

इन्हें खरीदते समय, बस यह सुनिश्चित कर लें कि आप अच्छे ब्रांड जैसे हैवेल्स, फिनोलेक्स, पॉलीकैब या किसी भी शीर्ष भारतीय ब्रांड के लिए जाएं जो बी.आई.एस मानकों के अनुसार उत्पाद बनाते हैं।

सही कार्यान्वयन भागीदार कैसे चुनें?

आपके द्वारा चुने गए उत्पादों का सही सेट चुनने के बाद, एक कार्यान्वयन साझेदार या सिस्टम इंटीग्रेटर चुनें जो आपको उस प्रकार की चीजें प्रदान कर सकता है जिनकी आपको आवश्यकता है। तिथि के अनुसार, MNRE द्वारा सूचीबद्ध 9000 चैनल साझेदार हैं जो आपके लिए सिस्टम कार्यान्वयन कर सकते हैं। इस MNRE लिंक पर उसी की एक सूची उपलब्ध है। एमएनआरई ने अपनी वित्तीय क्षमता के आधार पर चैनल भागीदारों को टाईयर में वर्गीकृत किया है। तो, यदि आप ऊपर दिए गए लिंक में सूची को देखते हैं, आपको चैनल पार्टनर के नाम के अनुसार 1A, 1B, 2A, 2B, 3A, 3B जैसी श्रेणियां मिलेंगी। यह श्रेणी कंपनी की वित्तीय ताकत पर आधारित है। हालांकि, यह टिप्पणी करना मुश्किल है कि कौन काम ठीक से कर सकता है, लकिन यह वर्गीकरण आपको निर्णय लेने में थोड़ी मदद कर सकता है। सुनिश्चित करें कि आप सिस्टम इंटीग्रेटर से सही सवाल पूछें कि आपको क्या मिल रहा है और उसको ऊपर लिखे मापदंड की कसौटी पर चेक अवश्य करें । इसके अलावा, उन वारंटियों को भी समझें जो आपको सिस्टम इंटीग्रेटर के साथ मिलती हैं।

सोलर पीवी रूफटॉप पर सब्सिडी कैसे प्राप्त करें?

MNRE के नोटिस के अनुसार, CFA (केंद्रीय वित्त सहायता) या सब्सिडी सोलर रूफटॉप पीवी कार्यान्वयन के लिए उपलब्ध है। सीएफए सामान्य श्रेणी के राज्यों / संघ राज्य क्षेत्रों के लिए बेंचमार्क लागत का 30% है और सिक्किम, जम्मू और कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, लक्षद्वीप और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह सहित पूर्वोत्तर राज्यों के लिए बेंचमार्क लागत का 70% है। बेंचमार्क लागत और सीएफए स्तर एमएनआरई द्वारा समय-समय पर संशोधित किए जाते हैं।

एमएनआरई द्वारा निर्धारित वर्तमान बेंचमार्क लागत – 100 kWp तक की परियोजनाओं के लिए Rs. 100 / Wp और 100 kWp – 500 kWp के बीच परियोजनाओं के लिए 90 / Wp है। कृपया ध्यान दें, यह योजना वर्तमान में केवल 500 kWp परियोजनाओं तक उपलब्ध है।

सब्सिडी केवल इन श्रेणियों के लिए उपलब्ध है:

  • आवासीय: सभी प्रकार के आवासीय भवन।
    संस्थागत: स्कूल, स्वास्थ्य संस्थान जिनमें मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान (सार्वजनिक और निजी दोनों),अनुसंधान एवं विकास संस्थान, आदि।
  • सरकारी इमारतें: केंद्र और राज्य सरकार की इमारतें दोनों।
  • सामाजिक क्षेत्र: सामुदायिक केंद्र, कल्याणकारी घर, वृद्धाश्रम, अनाथालय आदि।

आप सब्सिडी के लिए आवेदन कैसे करते हैं? सब्सिडी के लिए आवेदन की प्रक्रिया काफी सीधी है। इसके लिए आपको अपनी राज्य नोडल एजेंसी से संपर्क करना होगा। एमएनआरई ने प्रत्येक राज्य में एक नोडल एजेंसी (या ऊर्जा विकास एजेंसी) स्थापित की है, उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र में, यह मेडा (महाराष्ट्र ऊर्जा विकास एजेंसी) है, आंध्र प्रदेश में यह एनईडीसीएपी (गैर-पारंपरिक ऊर्जा विकास निगम) है।सभी राज्यों की नोडल एजेंसियों की सूची और उनके संपर्क पते / फोन / वेबसाइट आदि MNRE की वेबसाइट पर इस लिंक पर उपलब्ध है: http://mnre.gov.in/related-links/contact-us/state-nodel-agencies/

सब्सिडी प्राप्त करने के लिए, आपको इसके लिए राज्य नोडल एजेंसी के साथ परियोजना के बारे में सभी प्रासंगिक विवरणों के साथ आवेदन करना होगा। विवरण में परियोजना के सभी तकनीकी और वित्तीय पहलू शामिल हैं (इस लिंक पर उपलब्ध एक नमूना प्रपत्र)। आपको सभी विवरणों को भरने के लिए अपने सिस्टम इंटीग्रेटर की मदद लेनी चाहिए (आपको पैनल, इनवर्टर आदि के बारे में सभी तकनीकी डेटा मिलेंगे)। एक बार जब आप उपयुक्त विवरण भर देते हैं, तो आपको राज्य नोडल एजेंसी के साथ एक आवेदन करना होगा। नोडल एजेंसी के मूल्यांकन के बाद अंतिम विचार और अनुमोदन के लिए परियोजना को एमएनआरई को भेज दिया जाता है।

सब्सिडी के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण बिंदु

सब्सिडी के बारे में सोचने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं के बारे में पता होना चाहिए:

  • हालाँकि CFA को 30% कहा जाता है लकिन यह बदलता रहता है । व्यक्तिगत परियोजनाओं के लिए, CFA का स्तर राज्य नोडल एजेंसी द्वारा निर्धारित किया जाता है और MNRE द्वारा अनुमोदित किया जाता है। तो यह वास्तविकता में शायद 30% न मिले ।
  • लगभग हर राज्य में सब्सिडी पाने के लिए लंबी कतार है। वास्तव में कई राज्यों में काफी समय से सब्सिडी का एक पैसा भी वितरित नहीं किया गया है। एमएनआरई विशेष रूप से बताता है कि लोगों को किसी परियोजना को लागू करने से पहले सब्सिडी के लिए इंतजार नहीं करना चाहिए क्योंकि यह नहीं पता है कि इसमें कितना समय लग जायेगा ।
  • जैसा कि सब्सिडी के लिए लम्बी कतार लगी है फिर भी हो सकता है की आपको ऐसे एजेंट मिले जो दावा करते हैं कि वे आपको सब्सिडी प्राप्त कर सकते हैं। कृपया अपनी मर्जी से उनसे निपटें। यदि आपको प्रोजेक्ट बिना सब्सिडी के आपको फायदा दे तो आप बिना सब्सिडी के प्रोजेक्ट को लागू करने का निर्णय ले सकते हैं।
  • लंबी कतार होने के कारण, MNRE अंतिम अनुमोदन करने के लिए एक प्राथमिकता सूची का उपयोग करता है। सभी सामाजिक क्षेत्र की परियोजनाएं, सरकारी परियोजनाएं और संस्थागत परियोजनाएं एक समृद्ध और संपन्न उच्च-मध्यम वर्गीय आवासीय समाज की परियोजना पर प्राथमिकता दी जा सकती हैं।
  • जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, सब्सिडी प्राप्त करने के लिए आपके पैनलों को मेड इन इंडिया होना चाहिए। आप ऐसे मामले में शायद दक्षता पर थोड़ा समझौता करना पड़े । आपको यह निर्णय करते समय यह निर्णय लेना होगा की सब्सिडी आपको hit मे है या बिना सब्सिड़ी के आप अच्छा प्रोजेक्ट लागू कर सकते हैं।

क्या कोई अन्य वित्तीय सहायता उपलब्ध है?

  • IREDA (या भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी) सिस्टम इंटीग्रेटर्स को 9.9% से 10.4% की रियायती दर पर ऋण प्रदान कर सकती है ।
  • गृहस्वामी सौर पीवी संयंत्र स्थापित करने में मदद पाने के लिए गृह सुधार ऋण के रूप में होम लोन के लिए उपलब्ध समान दर जो गृह विस्तार योजना के लिए लागो होता है को पा सकते हैं। अधिकांश सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने अपनी शाखाओं को उसी के लिए नोटिस जारी किए हैं।

निजी, वाणिज्यिक और औद्योगिक इमारतों के बारे में क्या करें?

यदि आपके पास एक निजी, वाणिज्यिक या औद्योगिक भवन है और आप सोलर पीवी रूफटॉप सिस्टम स्थापित करना चाहते हैं, तो आप सब्सिडी के लिए पात्र नहीं हैं। लेकिन, आप त्वरित मूल्यह्रास (Accelerated Depreciation Benefits) लाभके लिए पात्र हैं। वर्तमान में उपलब्ध त्वरित मूल्यह्रास एक वर्ष में 80% है (इसमें इसके बारे में 40% से कम आने की चर्चा है)।

किसी भी उद्योग के लिए, आम तौर पर किसी भी पूंजीगत व्यय (जैसे प्लांट और मशीनरी) के लिए 15% मूल्यह्रास का दावा किया जा सकता है, जिसका अर्थ है कि यदि आप किसी भी वर्ष में पूंजी निवेश करते हैं, तो आप कर-लाभ का दावा करने के लिए मूल्य में 15% मूल्यह्रास का दावा कर सकते हैं। सौर पीवी छत के मामले में यह पहले वर्ष में 80% के समान है। जिसका अर्थ है, लगभग 4 वर्षों में आप परियोजना के पूरे मूल्य को पूरी तरह से कम कर देंगे।

नेटमैटरिंग और वे बदलाव जो ग्रिड-कनेक्टेड को आकर्षक बनाते है

आपके लिए यह सोचना अति आवयशयक है कि – आपकी बिजली वितरण कंपनी (एक कंपनी जो आपको बिजली बेचकर पैसा कमाती है) क्यों आपसे सौर ऊर्जा बिजली खरीदना चाहेगी? यह संभव हुआ सरकार द्वारा शुरू की गई नीति जिसमे देश मे बिजली कि कमी को पूरा करने के लिए roof टॉप को अधिक से अधिक इस्तेमाल कर बिजली का उत्पादन किया जाय। इस परियोजना से solar पैनल का उत्पादन बढ़ना स्वाभाविक है और solar पैनल के दामों में गिरावट ने भी इसको आगे बढ़ने मे प्रोत्साहन दिया है भारत में देश के कई हिस्सों में बिजली की भारी कमी है। सूरज की रोशनी एक निशुल्क संसाधन है, और सौभाग्य से, यह हमारे देश में बहुतायत से है। इस प्रकार, नि: शुल्क संसाधन, अर्थात् सौर ऊर्जा का अच्छा उपयोग करने के लिए, सरकार ने ऐसी नीतियों को लागू करना शुरू कर दिया है, जो प्रत्येक व्यक्ति के घर या इमारत या को बिजली के निर्माता बनने के लिए बहुत खुली जगह देती हैं। इसलिए, यह सरकार के आदेश के कारण है कि आपकी बिजली वितरण कंपनी को आपके स्वयं के सिस्टम द्वारा उत्पादित बिजली खरीदना है। हमें न केवल कमी को कवर करने के लिए solar बिजली उत्पादन मे सहयोग है बल्कि हरित पहल मे भी हमारा योगदान है।

ऐसी नीति के कार्यान्वयन के कारण, अब आप “ग्रिड कनेक्टेड” सौर पीवी सिस्टम लगा सकते हैं जो काफी किफायती हैं (बैटरी की लागत नहीं)।

सौर ऊर्जा कि नई नीति कैसे काम करती है?

“ग्रिड कनेक्टेड” सोलर पीवी सिस्टम से संबंधित हर चर्चा में, आपको इन दो शब्दों के सम्बन्ध मे बहुत सुनाई देगा: “नेट-मीटरिंग” या “सकल (gross) मीटरिंग”। आइए इन दोनों को समझे:

नेट-मीटरिंग: इस प्रणाली में, आपके पास एक नया द्वि-दिशात्मक (Bi-directional) मीटर है। जब आप ग्रिड (या अपनी बिजली की आपूर्ति) से बिजली का उपभोग करते हैं, तो मीटर रीडिंग आगे बढ़ेगी; लेकिन, जब आप बिजली का उत्पादन करते हैं और इसे ग्रिड को भेजते हैं, तो मीटर रीडिंग पीछे की ओर चली जाएगी। मान लीजिए आप एक दिन में 10 यूनिट बिजली का उपयोग करते हैं और 8 यूनिट का उत्पादन करते हैं, तो आपका मीटर 2 यूनिट का रीडिंग दिखाएगा। और अगर आप 10 यूनिट बिजली का उपयोग करते हैं और 12 यूनिट का उत्पादन करते हैं, तो आपका मीटर -2 यूनिट दिखाएगा। महीने के अंत में आपका बिल खपत / उत्पादित ‘नेट यूनिट’ पर आधारित होगा। यदि आप किसी महीने में अतिरिक्त बिजली उत्पन्न करते हैं, तो अतिरिक्त यूनिट उत्पादन अगले महीने तक ले जाया जाता है और उस माह मे ‘नेट’ किया जाता है। एक वर्ष के अंत में, यदि आपका कुल उत्पादन आपके द्वारा खपत की गई राशि से अधिक है, तो आपको अपने राज्य के ‘बिजली नियामक आयोग’ द्वारा तय की गई यूनिट रेट पर बिजली का भुगतान मिलेगा।

सकल-मीटरिंग: इस प्रणाली में दो मीटर होते हैं, एक आपकी बिजली की खपत को मापता है और दूसरा आपके बिजली उत्पादन को मापता है। नतीजतन, आपको दो अलग-अलग बिल मिलते हैं: एक खपत के लिए और दूसरा उत्पादन के लिए। आपके उपभोग के बिल (जैसे आज होता है) में कोई बदलाव नहीं होता है, लेकिन आपके द्वारा उत्पादित बिजली के लिए आपको अलग से भुगतान किया जाता है। फिर, आपके द्वारा भुगतान की जाने वाली बिजली की लागत राज्य के बिजली नियामक आयोग द्वारा तय की जाती है। किसी व्यक्ति के पास सकल-पैमाइश (gross मीटरिंग) के लिए जाने का केवल एक कारण है कि इस प्रणाली मे स्थापित क्षमता की कोई सीमा नहीं है और कोई व्यक्ति सकल पैमाइश के माध्यम से कमाई के लिए अपने खाली प्लॉट जैसे एरिया का उपयोग कर सकता है।

दोनों अलग कैसे हैं?: यदि आप बिजली की यूनिट रेट (घरेलू टैरिफ स्लैब की जाँच करें) को देखते हैं, तो बिजली की यूनिट रेट कम होते है जब खपत कम होती है और खपत अधिक होने पर यह अधिक होते है। जब आप अपनी खपत को ‘नेट’ करते हैं, तो आपको शुद्ध खपत के लिए टैरिफ के निचले स्लैब पर बिल जरूर बनेगा, लेकिन कनेक्टेड लोड पर फिक्स्ड चार्ज, शुल्क आदि बिल मे लिया जायेगा। ग्रॉस पैमाइश के मामले में, सोलर पैनल कि कैपेसिटी कि कोई सीमा नहीं है। ग्रॉस पैमाइश के मामले में, सोलर पैनल कि कैपेसिटी कि कोई सीमा नहीं है, लेकिन आप उस वर्ष के लिए अपने राज्य के नियामक आयोग द्वारा तय किए गए टैरिफ के आधार पर उत्पादित सभी बिजली के लिए निर्धारित यूनिट रेट प्राप्त करते हैं और आपके अपने खली पड़े प्लाट का उपयोग कमाई लिए कर सकते हैं।

किन राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों में यह नीति लागू है?

वर्तमान मे, भारत के 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने “ग्रिड कनेक्टेड” सोलर पीवी का समर्थन करने के लिए नीति लागू की है। अभी के लिए, हमने उनकी नीति और टैरिफ दस्तावेज़ों (जैसा कि MNRE वेबसाइट से प्राप्त किया गया है) को निम्नलिखित तालिका में रखा है, लेकिन हम अपने भविष्य के पोस्ट में उनमें से प्रत्येक को समझाने का प्रयास करेंगे जिससे आप को निर्णय लेने मे सहयोग मिले ।

Sl. No. States State Policy for Grid Connected Solar Rooftop SERC Regulatory/ Tariff Order
1 Andhra Pradesh Andhra Pradesh Solar Policy 2015 APERC Order 2010 APERC Amendment 2010Andhra Pradesh Amendment Net Metering
2 Assam Assam Electricity Regulatory Commission’s Grid Interactive Solar PV Regulations 2015 dated 02.05.2015
3 Bihar Bihar State Electricity Regulatory Commissions Net-metering Regulation dated 7th July, 2015
4 Chhattisgarh Chhattisgarh Solar Energy Policy 2012-2017 Chhattisgarh Tariff Order for procurement of power from Rooftop PV Solar Power Projects by distribution licensees of State Regulations, 2013 Order for Connectivity and Distribution Charges for Solar Rooftop PV Projects – Issued on 29/10/2014
5 Delhi —- Delhi Electricity Regulatory Commission (Net Metering for Renewable Energy) Regulations, 2014 Guidelines under DERC (Net Metering for Renewable Energy) Regulations, 2014Brief Note on Guidelines under DERC (Net Metering for Renewable Energy) Regulations, 2014
6 Gujarat Gujarat Solar Power Policy 2015 Gujarat Solar Tariff Order 2012
7 Haryana Haryana Solar Policy 2014 Order for SPV Power Plants for Building/Areas of Haryana GovernmentRegulations for the Grid Connected Solar Rooftop Photovoltaic System
8 Himachal Pradesh Himachal Pradesh Solar Power Policy Himachal Pradesh Electricity Regulatory Commission Notification 2015
9 Jharkhand Jharkhand Solar Power Policy 2015
10 Karnataka Karnataka Solar Policy 2014-2021 Karnataka Tariff Final Order 09.10.2013
11 Kerala Kerala Solar Policy 2013 Kerala KERC Order 10.06.2014
12 Madhya Pradesh Madhya Pradesh Electricity Regulatory Commission (Grid connected Net Metering) Regulations, 2015
13 Maharashtra Maharashtra Electricity Regulatory Commission (Net Metering for Roof-top Solar Photo Voltaic Systems) Regulations, 2015
14 Manipur Manipur Solar Policy 2014
15 Meghalaya Meghalaya State Electricity Regulatory Commission Notification 2015
16 Orissa Net Metering/Bi-Directional Metering & their Connectivity for Rooftop Solar PV Projects Dated 26.11.2014
17 Punjab Punjab Solar Rooftop Policy 2014 Punjab State Electricity Regulatory Commission Notification,7th May, 2015
18 Rajasthan Rajasthan Solar Energy Policy, 2014 Connectivity and Net Metering for Grid Interactive Rooftop and Solar Systems, Regulations, 2015
19 Tamil Nadu Tamil Nadu Solar Energy Policy 2012 Tamil Nadu TNERC Order 7.3.2013Tamil Nadu TNERC Amendment Order 31.07.2013
20 Telangana Telangana Solar Power Policy 2015
21 Uttar Pradesh Uttar Pradesh Rooftop Solar Photovoltaic Power Plant Policy, 2014 Uttar Pradesh Electricity Regulatory Commission (Rooftop Solar PV Grid Interactive Systems Gross / Net Metering) Regulations, 2015
22 Uttarakhand Uttarakhand Solar Policy 2013 Uttarakhand Tariff Order 2013
23 West Bengal West Bengal Solar Policy 2012 West Bengal WBERC Notification 2013
24 Andaman and Nicobar Joint Electricity Regulatory Commission for the state of Goa and Union Territories (Solar Power – Grid Connected Ground Mounted and Solar Rooftop and Metering Regulations – 2014) and Solar Power Tariff
25 Chandigarh
26 Dadar and Nagar Haveli
27 Daman and Diu
28 Lakshadweep
29 Pondicherry Puducherry Solar Energy Policy 2015(notified on 01-03.2016)
30 Goa

क्या मुझे ग्रिड-कनेक्टेड सिस्टम के लिए अपनी बिजली वितरण कंपनी से अनुमोदन की आवश्यकता है?

आपको निश्चित रूप से अपने बिजली वितरण कंपनी से अनुमोदन लेने की आवश्यकता है। इसका कारण यह है किवितरण कंपनी आपके सिस्टम द्वारा उत्पन्न बिजली खरीदेंगे। अपना प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले, आपको अपनी बिजली वितरण कंपनी को एक फॉर्म जमा करना होगा (जो ऑनलाइन या ऑफलाइन भी किया जा सकता है)। फॉर्म में, आपको अपने पीवी प्रोजेक्ट के सभी तकनीकी विवरण, अपने बिजली के बिल और अन्य प्रासंगिक दस्तावेजों के साथ सूचीबद्ध करना होगा। बिजली वितरण कंपनी सिस्टम स्थापित करने से पहले सिस्टम कि साध्यता का अध्ययन भी करेगी।

एक बार सिस्टम स्थापित हो जाने के बाद, बिजली वितरण कंपनी आपके साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर करेगी जिसे “पावर खरीद समझौता” या पीपीए कहा जाता है। यह समझौता उन नियमों और शर्तों को पूरा करेगा, जिन पर बिजली वितरण कंपनी आपसे बिजली खरीदेगी। यह राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा स्थापित शर्तों के अनुरूप होना चाहिए और खरीद की शर्तों को पूरा करेगा।

एक बार जब सिस्टम लग जाता है और पीपीए पर हस्ताक्षर हो जाते हैं, तो आपकी बिजली वितरण कंपनी घर पर एक “नेट मीटर” स्थापित करेगीऔर पुराना मीटर निकाल देगी । यदि आपके पास सकल मीटरिंग है, तो आपको एक अतिरिक्त मीटर मिलेगा और पुराना मीटर यदि लगा है तो वैसे hi लगा रहेगा सब कुछ सेट और कनेक्ट होने के बाद आपका सिस्टम काम करना शुरू कर देगा।

ग्रिड से जुड़े सिस्टम के लिए लागत और अर्थशास्त्र कैसे काम करते हैं?

किसी भी अन्य उपकरण की तरह, आपको सोलर पीवी के लिए भी बाजार में अलग-अलग लागत वाले उत्पाद मिलेंगे। लेकिन फिर किसी भी अन्य उपकरण की तरह, आपको उत्पाद की गुणवत्ता के बारे में पता होना चाहिए ताकि आपकी अपेक्षाएं उत्पाद के प्रदर्शन के साथ मेल खाएं। टियर 1 निर्माता (इस पृष्ठ पर ऊपर सूचीबद्ध) महंगे होंगे, लेकिन उनके उत्पाद लंबी अवधि में बेहतर प्रदर्शन करेंगे, जबकि सस्ता शायद समय के साथ अच्छा प्रदर्शन न करे। पिछले कुछ वर्षों में सौर पीवी रूफटॉप “ग्रिड कनेक्टेड” प्रणाली की बेंचमार्क लागत 75,000 / kWp और 1,00,000 / kWp के बीच रही है। वास्तव में, यदि आप आज के दिन कीमतों की जांच करते हैं, तो आपको मिलने वाले कोटशन 60,000 / kWp और 90,000 / kWp (एक अच्छी गुणवत्ता प्रणालियों के लिए) के बीच मिलने कि सम्भावना है ।

यदि आपका कनेक्टेड लोड 5 किलोवाट है और आपके पास 5 kWp सिस्टम स्थापित करने के लिए पर्याप्त जगह है, तो इसकी कीमत लगभग 3,75,000 रुपये होगी। आमतौर पर 1 kWp पैनल प्रति वर्ष लगभग 1300-1400 यूनिट बिजली उत्पन्न करता है (यह प्रचुर प्रकाश वाले दिनों में अधिक और कम रोशनी वाले दिनों में कम होगा)। तो इस हिसाब से एक 5 kWp सिस्टम हर साल आपके बिजली बिल से लगभग 6500 यूनिट की भरपाई करेगा। यदि आपकी औसत प्रति-यूनिट लागत 7 रु है तो वह प्रति वर्ष 45,500 रूपए से अधिक (बचत अधिकतम स्लैब पर होगी ) बचत होगी । 7 रुपये प्रति यूनिट पर, आप 8 साल (सब्सिडी के बिना) और 5 साल में (30% सब्सिडी के साथ) परियोजना की लागत वसूल करेंगेऔर उसके बाद आपको हर वर्ष एक मुश्त राशि का बिजली बिल मे फायदा होता रहेगा । यदि प्रति यूनिट लागत अधिक है, तो लागत वसूली और जल्दी से होगी।

आप प्रत्येक राज्य के लिए एक रूफ-टॉप सोलर सिस्टम के लिए ROI की जांच के लिए MNRE वेबसाइट पर जाकर इस कैलकुलेटर का इस्तेमाल कर सकते हैं।

About the Author:
Abhishek Jain is an Alumnus of IIT Bombay with almost 10 years of experience in corporate before starting Bijli Bachao in 2012. His passion for solving problems moved him towards Energy Sector and he is keen to learn about customer behavior towards Energy and find ways to influence the same towards Sustainability. .

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