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बिजली बचत के लिए आदर्श एयर कंडीशनर तापमान

By on August 27, 2015 with 4 Comments  

पहले भारत में एयर कंडीशनर खरीदने को विलासिता की निशानी माना जाता था| परन्तु आजकल एयर कंडीशनर खरीदने का चलन भारत में काफी आम होता जा रहा हैं| कई शहरी घरों में एक या अधिक कमरे में एयर कंडीशनर होना मामूली बात हो गई हैं| लेकिन हर वो व्यक्ति, जो एक एयर कंडीशनर का मालिक है, उसे भलीभाति ज्ञात है, कि एक एयर कंडीशनर बिजली के बिल में वृद्धि की अर्थपूर्ण कीमत पर आता है| एयर कंडीशनर द्वारा तापमान को ठंडा करने में काफी मात्रा में बिजली का इस्तेमाल होता है, हालांकि प्रभावी कदम लेने से निश्चित रूप से बिज़ली की खपत कम हो सकती हैं| एयर कंडीशनरों के लिए सही तापमान बनाए रखना जिनमे एक प्रमुख कदम होता हैं|

एक एयर कंडीशनर कैसे काम करता है?

ज्यादातर लोगों के लिए, एयर कंडीशनर सिर्फ एक ऐसा सेट हैं जो एक कूलर की तरह बाहरी हवा को ठंडा कर के अंदर फेंकता है| लेकिन क्या वो वास्विकता में ऐसे ही काम करता है? सच तो यह है की एयर कंडीशनर कमरे के अंदर की हवा को ले कर ठंडा कर के वापस अंदर फेंकता है| यह एयर कूलर्स के काम करने की प्रकिया से काफी विपरीत है| एयर कूलर्स कमरे के बाहर की हवा अंदर लेते हैं, उसे पानी के माध्यम से ठंडा करते हैं, और फिर अंदर फेंक देते हैं| लेकिन एयर कंडीशनर सिर्फ आंतरिक हवा पर काम करते हैं|

एक थर्मोस्टेट कैसे काम करता है?

लोगों को ऐसा लगता है की एयर कंडीशनर को अगर 18 डिग्री पर सेट करेंगे तो वह कमरे को ज़्यादा जल्दी ठंडा करेगा| पर ऐसा नहीं है, थर्मोस्टेट सिर्फ कमरे के अंदर की हवा के तापमान की जांच करता है, और जब तापमान वांछित स्तर तक पहुँच जाता है, तब थर्मोस्टेट कंप्रेसर को बंद कर देता हैं| इसका मतलब यह हैं की अगर उसे निचले स्तर पर सेट किया हो तो कंप्रेसर ज्यादा टाइम तक काम करता हैं| अर्थार्त – अगर तापमान को 25 डिग्री की जगह 18 डिग्री पर निर्धारित कर दिया जाएँ, तब वो ज्यादा काम करता हैं और बिज़ली की खपत भी अधिक होती हैं| साधारण कंप्रेसर एक ही गति से एक ही वाट क्षमता से काम करते हैं, इसका मतलब यह है की कंप्रेसर जितनी ज़्यादा देर तक चलेगा उतनी ही ज़्यादा बिजली की खपत होगी और उसे 25 डिग्री तापमान करने में कम समय लगेगा और 18 डिग्री करने में ज़्यादा|

कंप्रेसर बंद हो जाता है तो क्या होता है?

जब कंप्रेसर बंद हो जाता है और थर्मोस्टेट वांछित तापमान स्तर तक पहुँच जाता है, तब एयर कंडीशनर का सिर्फ पंखा चलता है| इस स्तर पर बिजली की खपत केवल चल रहे पंखे से ही होती है, कंप्रेसर से नहीं| जब तापमान सेट किये हुईं स्तरों से बढ़ता हैं, तब थर्मोस्टेट इसको नापता हैं, और कंप्रेसर फिर से चल पड़ता है| कंप्रेसर एयर कंडीशनर का सबसे अधिक बिजली खपत घटक है|

एयर कंडीशनर के प्रमुख बिजली खपत कारक कौन कौन से हैं?

बिजली लोड को प्रभावित करने वाले 4 कारक हैं :

1) कमरे की हवा का तापमान

2) बाहरी तापमान

3) कमरे का थर्मल इन्सुलेशन

4) एयर कंडीशनर के तापमान की स्थापना

अगर इनडोर/आउटडोर तापमान के बीच का अंतर बहुत बड़ा है, तो एयर कंडीशनर कंप्रेसर लंबी अवधि के लिए चलेंगे और घर के अंदर का वांछित तापमान को शांत करने के लिए बहुत अधिक बिजली की आवश्यकता होगी| अगर बहार का तापमान 38 डिग्री है तो अंदर का तापमान 18 डिग्री लाने की बजाय 24 डिग्री लाने में बिजली की काम खपत होगी| ACEEE (अमेरिकी ऊर्जा दक्षता और अर्थव्यवस्था परिषद) के अनुसार प्रत्येक डिग्री सेल्सियस वृद्धि पर 3-5 % की बिज़ली खपत को बचाया जा सकता है, इससे बिजली बिल में भी काफी गिरावट लायी जा सकती है|

थर्मोस्टेट का आदर्श तापमान क्या सेट होना चाहिए?

तापमान में वृद्धि, आराम के स्तर को कम नहीं करती है. वास्तव में ASHRAE (अमेरिकन सोसायटी आफ ताप, रेफ्रिजरेटिंग और एयर कंडीशनिंग इंजीनियर्स), के अनुसार आराम के लिए आदर्श तापमान गर्मियों में 23.5 डिग्री और 25.5 डिग्री के बीच है (यह कई कारकों पर निर्भर करता है जैसा विकिपीडिया पर सूचीबद्ध है). इस प्रकार 24 डिग्री पर एयर कंडीशनर का तापमान सेट करने पर बिजली का बिल बहुत मात्रा में बचाया जा सकता है और यह अच्छी सुविधा भी प्रदान करता है| एयर कंडीशनर के साथ पंखे का इस्तेमाल भी काफी लाभदायक होता है| पंखा चलने पर एयर कंडीशनर का तापमान बिना किसी तकलीफ के बढ़ाया जा सकता है, जिससे बिजली की बचत हो सकती है|Air Conditioner Temperature Infographic

क्या एयर कंडीशनरों में “त्वरित कूल” विकल्प  से मदद मिलती है?

अगर एयर कंडीशनर को “त्वरित कूल”  पर सेट कर दें तो तापमान 18 डिग्री या 16 डिग्री पर सेट हो जाता हैं| इसका मतलब यह है कि कंप्रेसर तभी शांत होगा जब इनडोर तापमान भी इस स्तर तक पहुँच जाये| अगर इनडोर तापमान 35 या 40 डिग्री से नीचे आ रहा है, तब यह निश्चित रूप से 24 डिग्री को पार कर रहा है जो कि एक आरामदायक तापमान है| इसलिए “त्वरित कूल” का उपयोग फायदेमंद नहीं हैं और यह बिजली  खपत को भी बढ़ा देता है| अगर इनडोर तापमान 24 डिग्री के लिए स्थापित किया गया होता तब बिजली खपत भी कम होती|

पुराने एयर कंडीशनर कैसे थर्मोस्टेट के बिना काम करते थे?

पुराने एयर कंडीशनर जो थर्मोस्टेट के बिना काम करते थे, उनमे हाई, मध्यम और लो विकल्प हुआ करते थे| जैसा की हमने पहले पड़ा/सीखा हैं कि एयर कंडीशनर के कम्प्रेसर द्विआधारी मोड (या तो वह चलते हैं या बंद होते हैं) में काम करते हैं| थर्मोस्टेट के बिना एक एयर कंडीशनर हवा के तापमान को नियंत्रित नहीं करता है| हाई, मध्यम और लो विकल्प सिर्फ एयर कंडीशनर के पंखे की गति में परिवर्तन करता है| हाई विकल्प में एयर कंडीशनर तेज़ हवा फेंकता है और लो विकल्प में धीरे| यह विकल्प न तो कमरे के तापमान को बदलते हैं और न ही बिजली की खपत में कोई अंतर लाता हैं|

About the Author:
Abhishek Jain is an Alumnus of IIT Bombay with almost 10 years of experience in corporate before starting Bijli Bachao in 2012. His passion for solving problems moved him towards Energy Sector and he is keen to learn about customer behavior towards Energy and find ways to influence the same towards Sustainability. .

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