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सौर वॉटर हीटर प्रणाली – यह बिजली के बिल पर बचत में कैसे मदद कर सकते हैं

By on August 27, 2015

भारत में सौर और नवीकरणीय ऊर्जा इन दिनों काफी लोकप्रिय हैं| सरकारी सहायता, मार्केटिंग और सब्सिडी ने इनकी लोकप्रियता में इज़ाफ़ा करने में बहुत अधिक सहायता भी की हैं| बहुत से लोग इन तकनीकों को अपनाना चाहते हैं, लेकिन वह इसके कई तकनीकी पहलु से अनजान ही रहते हैं, जैसे इस ऊर्जा क्या करना है और इसे कैसे प्राप्त करें, आदि|

बिजली बचाओ द्वारा हम लोगों को उनके घरों में अक्षय स्रोतों को अपनाने और समझने में मदद करने के लिए लगातार प्रेरित करते रहते हैं| इसलिए, हमने तय किया की हम सौर वॉटर हीटर प्रणाली पर एक लेख लिख कर अपने पाठकों के समक्ष प्रस्तुत हो| इस लेख में हमने सौर वॉटर हीटर प्रणाली संबंधित कई सवाल पर विवरण प्रदान किया हैं|

सौर वॉटर हीटर क्या है?

सौर वॉटर हीटर एक प्रणाली होती है, जिसमे पानी गर्म करने के लिए सौर ऊर्जा (या सूर्य के प्रकाश से ऊर्जा) का इस्तेमाल होता है| इसमें जिससे छत या और कोई और खुली जगह जहाँ से यह सूर्य का प्रकाश और सूर्य से ऊर्जा ले सकता है, वहां इस प्रणाली को स्थापित किया जाता है | सूर्य से ऊर्जा का उपयोग यह पानी को गर्म करने में करता हैं, और यह ऊर्जा को एक इंसुलेटेड टैंक में संचित करता है| यह प्रणाली बिजली की आपूर्ति से जुडी नहीं होती है, इसलिए इसमें चालू-बंद स्विच की जरूरत नहीं भी होता है| यह पानी को गर्म करने और भंडारण टैंक में संचित करने के लिए मात्र दिनभर सूरज की रोशनी का ही उपयोग करता है और उसको आगे जरुरत के अनुसार किसी भी कार्य के लिए इस्तेमाल करता रहता हैं|

बाजार में उपलब्ध विभिन्न प्रकार के सौर वॉटर हीटर:

भारतीय बाजार में दो प्रकार के सौर वॉटर हीटर उपलब्ध हैं:

1) एफपीसी (फ्लैट प्लेट कलेक्टर) प्रणाली: ये लम्बे जीवनकाल वाले धातु प्रकार के प्रणाली होते हैं|

2) इटीसी (ईवाकुअटेड ट्यूब कलेक्टर) प्रणाली: ये प्रणाली कांच की बनी होती है, और कमजोर भी होती हैं|

इन दोनों प्रकार के पानी के हीटर प्रणाली पम्प या पम्प के बिना भी आते हैं| पम्प का उपयोग कलेक्टर से भंडारण टैंक तक पानी ले जाने के लिए किया जाता है| पम्प के बिना वाली प्रणाली स्वतः कलेक्टर से भंडारण टैंक तक पानी ले जाने के लिए थर्मोसाइफन सिद्धांत का उपयोग करते हैं|

कैसे फैसला करें की कौन सा सौर वाटर हीटर खरीदें?

ईटीसी सिस्टम कमजोर तो होता हैं, लेकिन सस्ता भी होता हैं| ये उन क्षेत्रों के लिए भी बहुत अच्छे माने जाते है, जहाँ तापमान सब-शून्य के करीब होता है| जिन क्षेत्रों में पानी नमकीन होता है, वहां इन प्रणालियों को ग्लास ट्यूब की अंदरूनी सतह पर नमक के निक्षेप के कारण नियमित रूप से सफाई की आवश्यकता होती है|

एफपीसी प्रणाली लंबे समय तक चलते हैं, क्यूंकि ये धातु के बने होते हैं| लेकिन ये इटीसी प्रणालियों की तुलना में महंगे भी होते हैं| ये सब-शून्य तापमान के साथ ठन्डे क्षेत्रों में भी काम कर सकते हैं, परन्तु इन्हे एंटी-फ्रीज सलूशन की आवश्कता पड़ती हैं, जिस कारण इनकी लागत उच्च हो जाती हैं| जिन क्षेत्रों में पानी नमकीन होता है, वहां इन प्रणालियों को हीट-एक्सचेंजर प्रणाली की आवश्यकता होती है| हीट-एक्सचेंजर प्रणाली बड़े पैमाने पर गन्दगी/परत को जमा होने से रोकती हैं|

बिना पम्प की प्रणाली (थर्मोसाइफन) घरेलू और छोटे अनुप्रयोग उपयोगकर्ताओं के लिए (क्यूंकि यह सस्ते होते है) आदर्श माने जाते है| जिससे, इनके द्वारा प्राप्त पानी में उच्च क्लोरीन मात्रा नहीं होती है| पम्प के साथ उपलब्ध प्रणाली उद्योगों के लिए प्रायः अच्छे माने जाते हैं|

यह प्रणाली बरसाती/ओवेरकास्ट दिनों में कैसे प्रदर्शन करते है

कई लोग चिंतित रहते हैं कि सौर प्रणाली ओवेरकास्ट दिनों में ठीक प्रकार काम नहीं करेंगे| यदि ओवेरकास्ट अधिक नहीं हैं (एक या दो दिन से कम), तब भी प्रणाली ठीक प्रकार कार्य करेगी| इस दौरान प्रणाली वातावरण में विसरित विकिरण पर काम करता है| इस सौर प्रणाली को मौजूदा बिजली प्रणाली के साथ भी एकीकृत किया जा सकता है, जो की लंबी अवधी के ओवेरकास्ट दिनों के दौरान एक बैकअप के रूप में कार्य कर सकते हैं| यदि सौर वॉटर हीटर से पानी का तापमान 40 डिग्री सेंटीग्रेट से नीचे चला जाता है, तो आप बिजली सिस्टम का स्विच चालू कर सकते हैं| यदि आप के पास मौजूदा इलेक्ट्रिक वाटर हीटर है, तो सौर प्रणाली में इलेक्ट्रिक बैकअप आवश्यक नहीं होते है| किसी मामले में यदि आपके पास एक मौजूदा वॉटर हीटर नहीं है, तो आप एक इलेक्ट्रिक बैकअप स्थापित कर सकते हैं| आप दोनों प्रणालियों को अलग-अलग भी रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर ही इलेक्ट्रिक प्रणाली का उपयोग कर सकते हैं|

सौर वॉटर हीटर के रखरखाव के लिए आवश्यकता

1. यदि आपके पास ईटीसी प्रणाली है तो उसका कांच टूट सकता है, क्यूंकि यह कमजोर होता है| इसलिए कांच को कभी-कभी बदलने की जरूरत भी पड़ सकती है|

2. सौर वॉटर हीटर पर स्केलिंग नियमित रूप से हो सकती है, विशेष रूप से अगर पानी कठोर है| इसलिए, कलेक्टरों को एसिड का उपयोग करके नियमित रूप से सफाई की जरूरत होती है|

3. यदि वॉटर हीटर के बाहर की सतह चित्रित है, तो जंग लगने से बचाने के लिए इसे हर 2-3 साल में फिर से रंगने की जरुरत पड़ सकती है|

4. प्रणाली में कभी-कभी रिसाव हो सकता है और इस हालत में इसे स्थानीय प्लंबर से मरम्मत की जरुरत पड़ सकती हैं|

बाजार में उपलब्ध सौर वॉटर हीटर के आकार

बाजार में उपलब्ध सौर वाटर हीटर का आकार अमूमन 100 लीटर प्रतिदिन से शुरू होता है और 200, 250, 300 और 500 लीटर प्रतिदिन के अन्य आकार भी बाजार में उपलब्ध होते हैं| कलेक्टर को स्थापित करने के लिए इन्हे छत/खुला क्षेत्र का आवश्यक अधिकतम क्षेत्र निम्न अनुसार आवश्यक होता हैं:

क्षमता ( लीटर प्रति दिन )

ईटीसी प्रणाली के लिए वर्ग मीटर में क्षेत्र

एफपीसी प्रणाली के लिए वर्ग मीटर में क्षेत्र

100

1.5

2

200

3

4

250

3.75

5

300

4.5

6

350

7.5

10

ऊपर उल्लेखित लीटर प्रतिदिन गर्म पानी (60-70 डिग्री सेंटीग्रेट) तापमान के सोलर हीटर के लिए होते हैं| चार सदस्यों के एक परिवार के लिए 100 लीटर का आकार का सोलर हीटर उपयुक्त होता है| आप हमारे अन्य लेख में पानी के हीटर के आकार के बारे में और अधिक जाँच कर सकते हैं: बिजली की बचत के लिए सही आकार के वॉटर हीटर/गीजर को चुनें|

सौर वॉटर हीटर का प्रयोग करके बचत कैसे प्राप्त की जा सकती है?

एक 100 लीटर प्रतिदिन का सौर वाटर हीटर, भारत के विभिन्न भागों में वार्षिक बिजली इकाइयों की नीचे उल्लेख की गयी तालिका के अनुसार बचत कर सकता हैं:

उत्तरी क्षेत्र

पूर्वी क्षेत्र

दक्षिणी क्षेत्र

पश्चिमी क्षेत्र

प्रति वर्ष गर्म पानी के उपयोग के अनुमानित दिन

200 दिन

200 दिन

300 दिन

250 दिन

सौर गर्म पानी का पूरा उपयोग करने पर अनुमानित वार्षिक बिजली की बचत (बिजली की यूनिट)

1,000

1,000

1,500

1,250

पानी को गर्म करने के लिए इस्तेमाल की गयी बिजली इकाईयां, गर्म किये जाने वाले पानी की मात्रा पर निर्भर करती हैं, इसलिए बिजली इकाई की संख्या आकार बढ़ने पर उसी अनुपात में बढ़ भी जाती है| आप बचत का मूल्यांकन करने के लिए बिजली की प्रति यूनिट भुगतान का पता लगाने के लिए हमारे कैलकुलेटर का उपयोग कर सकते हैं: ऑनलाइन बिजली बिल कैलक्यूलेटर - भारत में सभी राज्यों के लिए|

सौर वॉटर हीटर प्रणाली की अनुमानित लागत

सौर वॉटर हीटर प्रणाली की अनुमानित लागत निम्न रूप में प्रस्तुत है:

क्षमता ( लीटर प्रति दिन )

ईटीसी प्रणाली की लागत (रुपए में)

एफपीसी प्रणाली की लागत (रुपए में)

100

15,000

22,000

200

28,000

42,000

250

34,000

50,000

300

40,000

58,000

350

15,000

22,000

(स्रोत:http://mnre.gov.in/file-manager/UserFiles/Guidelines_domestic_users_of_swh_cost_systems.pdf)

ऊपर दी गयी लागत-कलेक्टरों की लागत, इंसुलेटेड गर्म पानी के भंडारण टैंक, प्रणाली पाइपिंग, बिजली बैकअप, स्थापना आदि की लागत को समायोजित करती हैं| यह लागत पांच साल के प्रदर्शन की गारंटी के साथ, एमएनआरई द्वारा निर्धारित न्यूनतम तकनीकी विनिर्देश के रूप में शामिल है| सिस्टम से उपयोगिता बिंदु के लिए पाइपिंग की लागत, हीट-एक्सचेंजर्स (अगर कोई है) की लागत, अतिरिक्त लागत होती है| पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों, दूरदराज के क्षेत्रों और द्वीप समूह में, यह लागत 15 से 20% तक अधिक हो सकती है| ऊपर प्रस्तुत लागत निर्माता के अनुसार भी भिन्न हो सकती हैं।

सरकार के द्वारा उपलब्ध सब्सिडी

सौर वॉटर हीटर प्रणाली खरीदने वाले उपभोक्ताओं को सरकार सब्सिडी प्रदान करती है| उपलब्ध सब्सिडी कुछ इस प्रकार हैं - सामान्य श्रेणी के राज्यों में उपभोक्ताओं को लागत पर 30% और पर्वतीय क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को लागत पर 60%, उत्तर पूर्वी राज्यों और द्वीप समूह में कुछ मानक तक ही सीमित, ईटीसी के लिए प्रति वर्ग मीटर 3,000 रुपए और एफपीसी प्रणाली के लिए प्रति वर्ग मीटर 3,300 रुपए होती हैं|

उपलब्ध सब्सिडी कैसे प्राप्त करें और एक सौर प्रणाली कैसे स्थापित हो

एक सौर प्रणाली को स्थापित करने के लिए सबसे अच्छा स्रोत आपके राज्य की नोडल एजेंसी होती है| विभिन्न राज्य नोडल एजेंसियों के संपर्क नंबर एमएनआरई वेबसाइट पर उपलब्ध होते हैं और आप इसे www.solarwaterheater.gov.in पर भी प्राप्त कर सकते हैं| आप एमएनआरई के एक मान्यता प्राप्त साथी चैनल के माध्यम से भी सौर प्रणाली को स्थापित कर सकते हैं, यहाँ उनकी एक सूची प्रस्तुत हैं - सूची|

सौर वॉटर हीटर का उपयोग करना उपभोक्ताओं, सुविधाएं और पर्यावरण के लिए एक जीत (विन-विन) की सी स्थिति होती है| अक्षय ऊर्जा ही भविष्य की ऊर्जा है और इसको अपनाने में आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से हमे एक बहुत तार्किक विकल्प मिलता है।|

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